जयपुर– राजस्थान में सरकारी नौकरियों की विश्वसनीयता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मेहनत करने वाले युवाओं के सपनों को कुचलकर पैसे और साजिश के दम पर नौकरी हथियाने वाले एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है। मामला पटवार भर्ती परीक्षा 2021 से जुड़ा है, जहां मूल अभ्यर्थी ने खुद परीक्षा देने के बजाय एक ‘डमी कैंडिडेट’ को बिठाया और पास भी हो गया। हद तो तब हो गई जब यह फर्जीवाड़ा करके वह सरकारी मुलाजिम बनकर नौकरी भी करने लगा। लेकिन कानून के हाथ उस तक पहुंच ही गए। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने इस सनसनीखेज मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए मूल अभ्यर्थी और परीक्षा देने वाले डमी कैंडिडेट, दोनों को गिरफ्तार कर लिया है, जिससे पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।
साजिश का पर्दाफाश: असली की जगह बैठा ‘नकली’
एसओजी की जांच में सामने आया कि यह पूरा खेल डीग जिले के रहने वाले दो लोगों के बीच का था। मूल अभ्यर्थी गीतेश जादौन (28 वर्ष, निवासी खेरिया पुरोहित, डीग) ने साजिश के तहत अपने स्थान पर नीरज कुमार (30 वर्ष, निवासी बहज, डीग) को परीक्षा में बैठाया। नीरज ने गीतेश के नाम पर पटवार भर्ती परीक्षा 2021 दी और उसे पास भी करा दिया।


कुर्सी तक पहुंचा फर्जीवाड़ा: एसडीएम ऑफिस में तैनात था आरोपी
इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि फर्जीवाड़े के दम पर गीतेश जादौन का चयन पटवारी पद पर हो गया। इतना ही नहीं, उसे नियुक्ति भी मिल गई और वह वर्तमान में एसडीएम कार्यालय, सीकरी (जिला डीग) में पटवारी के पद पर कार्यरत भी था। यानी परीक्षा हॉल से लेकर सरकारी दफ्तर की कुर्सी तक, हर जगह धोखाधड़ी और कूटरचना का खेल चला।
एसओजी का शिकंजा: एक दिन पहले डमी, अगले दिन पटवारी गिरफ्तार
एसओजी के अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस विशाल बंसल ने बताया कि इस संबंध में 21 अक्टूबर 2024 को प्रकरण दर्ज किया गया था। जांच में धोखाधड़ी, कूटरचना और आपराधिक साजिश (IPC 420, 467, 468, 471, 120B) समेत राजस्थान सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम के तहत अपराध प्रमाणित पाए गए। अनुसंधान अधिकारी निरीक्षक सीमा पठान ने कार्रवाई करते हुए पहले 5 फरवरी 2026 को डमी कैंडिडेट नीरज कुमार को गिरफ्तार किया। इसके अगले ही दिन, 6 फरवरी को मूल अभ्यर्थी और कार्यरत पटवारी गीतेश जादौन को भी दबोच लिया गया। न्यायालय ने दोनों को 9 फरवरी 2026 तक पुलिस रिमांड पर भेजा है।
जांच का दायरा बढ़ा: अन्य भर्तियों के भी खुलेंगे राज?
एडीजी बंसल ने साफ किया है कि यह जांच यहीं नहीं रुकेगी। रिमांड के दौरान आरोपियों से यह उगलवाया जाएगा कि क्या उन्होंने या उनके गिरोह ने अन्य भर्ती परीक्षाओं में भी इसी तरह डमी कैंडिडेट बैठाए हैं? क्या किसी और भर्ती में भी यह खेल खेला गया है? एसओजी अब इस पूरे ‘मुन्नाभाई’ नेटवर्क की जड़ें खोदने में जुटी है, ताकि मेहनती युवाओं के हक पर डाका डालने वाले भर्ती माफिया का पूरी तरह सफाया किया जा सके।
