जयपुर, गुजरात के गांधीनगर (महात्मा मंदिर) में आयोजित तीन दिवसीय ‘राष्ट्रीय खनिज चिंतन शिविर’ के दूसरे दिन राजस्थान ने खनन क्षेत्र में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के अपने मॉडल को देश के सामने रखा। राज्य के प्रमुख सचिव (माइंस एवं भूविज्ञान)टी. रविकान्त ने ‘आइडेंटिफिकेशन ऑफ प्री-एम्बेडेड ब्लॉक्स फॉर ऑक्शन’ विषय पर प्रजेंटेशन देते हुए बताया कि राजस्थान खनन सुधारों में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
प्री-एम्बेडेड ब्लॉक: खनन की नई क्रांति
प्रमुख सचिव ने कहा कि खनन क्षेत्र में सबसे बड़ी चुनौती नीलामी के बाद खानों को चालू करने में लगने वाला समय है। इस समस्या के समाधान के लिए राजस्थान ने ‘प्री-एम्बेडेड ब्लॉक’ मॉडल अपनाया है, जिसमें नीलामी से पहले ही सभी आवश्यक वैधानिक अनुमतियां प्राप्त कर ली जाती हैं।
- वर्तमान स्थिति: राजस्थान में 8 मेजर मिनरल ब्लॉक्स के ऑक्शन की प्रक्रिया जारी है।
- भविष्य की योजना: विभाग ने 62 माइनर मिनरल और 5 अतिरिक्त मेजर मिनरल ब्लॉक्स को नीलामी के लिए चिन्हित किया है।
- लक्ष्य: केंद्र सरकार द्वारा दिए गए 5 प्री-एम्बेडेड ब्लॉकों के लक्ष्य के मुकाबले राजस्थान 8 ब्लॉकों पर काम कर रहा है, जबकि पड़ोसी राज्य गुजरात ने अब तक एक ब्लॉक पर काम शुरू किया है।
अनुमतियों के चक्रव्यूह को कम करने पर जोर
रविकान्त ने खनन परिचालन में होने वाली देरी को एक ‘देशव्यापी समस्या’ बताते हुए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए:
- समय सीमा में कटौती: जनसुनवाई से लेकर मिनिट्स जारी होने तक लगने वाले 2 माह के समय को कम किया जाए।
- समन्वय: आईबीएम (IBM), सेक (SEAC) और सीया (SEIAA) के बीच बेहतर तालमेल से माइनिंग प्लान की स्वीकृति में तेजी लाई जाए।
- सिंगल विंडो क्लीयरेंस: वर्तमान में एक खान शुरू करने के लिए लगभग 20 अनुमतियों की आवश्यकता होती है। वन एवं वन्यजीव विभाग के साथ मिलकर इस प्रक्रिया को सरल बनाना समय की मांग है।
[Mining operationalization delay causes infographic]
बंशीपहाड़पुर मॉडल की सराहना
सत्र के दौरान भरतपुर के बंशीपहाड़पुर में प्री-एम्बेडेड ब्लॉकों के सफल ऑक्शन की विशेष चर्चा की गई। इसे एक ‘केस स्टडी’ के रूप में प्रस्तुत किया गया कि कैसे पूर्व-अनुमतियों के साथ नीलामी करने से राजस्व और निवेश में भारी वृद्धि होती है और अवैध खनन पर लगाम लगती है।
चिंतन शिविर के मुख्य बिंदु: एक नज़र में
| विवरण | प्रमुख जानकारी |
| आयोजन | राष्ट्रीय खनिज चिंतन शिविर 2026 |
| स्थान | गांधीनगर, गुजरात (8-10 जनवरी) |
| राजस्थान का नेतृत्व | प्रमुख सचिव टी. रविकान्त |
| विशेष उपलब्धि | 8 मेजर प्री-एम्बेडेड ब्लॉकों की नीलामी प्रक्रिया |
| मुख्य मुद्दा | अनुमतियों में लगने वाले समय को घटाना (Operationalization) |
प्रतिनिधिमंडल: शिविर में राजस्थान की ओर से अतिरिक्त निदेशक (भूविज्ञान) आलोक प्रकाश जैन, भूवैज्ञानिक श्री सीपी दाधीच और श्री सुशील कुमार हुड्डा सहित वरिष्ठ अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं।
