(EXCLUSIVE INVESTIGATION: एक्सपोज़ नाउ ब्यूरो)
जयपुर। राजस्थान की अरावली पहाड़ियों और बेशकीमती खनिज संपदा पर सिर्फ माफिया का कब्जा नहीं है, बल्कि Expose Now की गहन पड़ताल इशारा करती है कि इस ‘महा-लूट’ की पटकथा खनन विभाग की फाइलों में ही लिखी गई है। भारतीय खान ब्यूरो (IBM) की रिपोर्ट ने जिस 70% उल्लंघन का खुलासा किया है, वह दरअसल एक प्रशासनिक आत्मसमर्पण है। Expose Now की इस विशेष पड़ताल में हम 2018 से 2025 तक के उन शर्मनाक आंकड़ों का कच्चा चिट्ठा खोल रहे हैं, जो साबित करते हैं कि राजस्थान की धरती को बचाने वाले ही इसकी नीलामी में शामिल थे।
डरावनी तस्वीर: 10 में से 7 खानों में नियमों का उल्लंघन

भारतीय खान ब्यूरो (IBM) के हालिया निरीक्षणों से जो डेटा छनकर बाहर आया है, वह रोंगटे खड़े करने वाला है। पिछले 7 वर्षों के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो पता चलता है कि राजस्थान में औसतन 70% से ज्यादा खानों में नियमों का उल्लंघन पाया गया है।
7 सालों का डेटा: कागजों पर निरीक्षण, जमीन पर डकैतीभारतीय खान ब्यूरो (IBM) के आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि राजस्थान में ‘माइनिंग रूल्स’ की धज्जियां उड़ाना एक पेशा बन चुका है।
नीचे दी गई टेबल विभाग की नाकामी और मिलीभगत का जीता-जागता सबूत है:
| वर्ष (Year) | कुल निरीक्षण (Inspections) | गंभीर उल्लंघन (Violations) | लूट का प्रतिशत (%) |
| 2018-19 | 83 | 71 | 85% |
| 2019-20 | 121 | 75 | 62% |
| 2020-21 | 68 | 61 | 89% (कोरोना काल में चरम पर लूट) |
| 2021-22 | 79 | 63 | 79% |
| 2022-23 | 95 | 60 | 63% |
| 2023-24 | 111 | 65 | 58% |
| 2024-25 (जारी) | 150 | 79 | 52% |
| कुल योग | 707 | 474 | औसत 70% उल्लंघन |
क्या है इन आंकड़ों का असली मतलब?
इस टेबल का विश्लेषण करने पर एक भयावह सच सामने आता है: राजस्थान की धरती को खोदने वाले माफियाओं को कानून का रत्ती भर भी डर नहीं है। चाहे निरीक्षणों की संख्या कम हो या ज्यादा, उल्लंघन का प्रतिशत हमेशा चिंताजनक रूप से ऊंचा रहा है। 2020-21 में जब पूरा देश कोरोना से जूझ रहा था, तब राजस्थान में 89% खानों में अवैध गतिविधियां चल रही थीं। यह दर्शाता है कि माफिया के लिए आपदा भी ‘अवसर’ थी।

- मिलीभगत की बू: 70% उल्लंघन का आंकड़ा यह साबित करने के लिए काफी है कि विभाग के अधिकारी या तो गहरी नींद में हैं या फिर माफिया की तिजोरी की चाबी उन्हीं के पास है। बिना स्थानीय ‘सेटिंग’ के इतने बड़े पैमाने पर उल्लंघन मुमकिन ही नहीं है।
- निरीक्षण में खुला खेल: हर दूसरी खान में मिली गड़बड़ी
इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान में जब माइनिंग साइट्स का रियलिटी चेक किया गया, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए:
- अंधाधुंध खनन: स्वीकृत ‘माइनिंग प्लान’ को दरकिनार कर तय सीमा से कहीं ज्यादा गहराई और दायरे में खुदाई की जा रही थी।
- सुरक्षा और पर्यावरण की अनदेखी: माइनिंग सेफ्टी के नियमों को धूल चटाई जा रही थी, जिससे पर्यावरण को भारी नुकसान पहुँच रहा है।
- बढ़ते आंकड़े: हालिया दौर में करीब 150 खानों की सघन जांच की गई, जिनमें से आधे से अधिक (79 मामले) में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं।
Expose Now का बड़ा खुलासा: पट्टे रद्द करना सिर्फ एक ‘पब्लिसिटी स्टंट’?


विभाग ढोल पीट रहा है कि उसने 44 पट्टे रद्द कर दिए और 72 लाख रुपये का जुर्माना वसूला। लेकिन Expose Now पूछता है—साहब, बाकी के गुनहगारों का क्या?
- जब 70% से ज्यादा खानों में गड़बड़ी मिली, तो कार्रवाई सिर्फ मुट्ठी भर लोगों पर ही क्यों?
- क्या पट्टे रद्द करने की कार्रवाई सिर्फ छोटे खिलाड़ियों पर हुई ताकि बड़े ‘मगरमच्छों’ को बचाया जा सके?
- 72 लाख का जुर्माना उस प्रदेश के लिए क्या है जहाँ हजारों करोड़ का पत्थर हर साल अवैध तरीके से सीमाओं के पार भेज दिया जाता है? यह माफिया के लिए सजा नहीं, बल्कि ‘खर्चा-पानी’ जैसा है।
इन्वेस्टिगेशन में खुली पोल: अधिकारी हैं या माफिया के ‘पार्टनर’?
निरीक्षण की रिपोर्ट चीख-चीख कर कह रही है कि राजस्थान में ‘अत्यधिक खनन’ (Over-mining) और ‘अवैध खनन’ (Illegal Mining) कैंसर की तरह फैल चुका है।
कागजी निरीक्षण: हर साल निरीक्षणों की संख्या बढ़ती है, लेकिन उल्लंघन का प्रतिशत कम होने के बजाय बढ़ता ही जा रहा है।
तकनीकी अधिकारियों की चुप्पी:
क्या विभाग के इंजीनियरों को यह नहीं दिखता कि पहाड़ अपनी जगह से गायब हो गए हैं? या फिर उनकी आंखों पर ‘सुविधा शुल्क’ की पट्टी बंधी है? राजस्थान की जनता के हक पर डकैती डाली जा रही है। पर्यावरण तबाह हो रहा है, जलस्तर गिर रहा है और माफिया मालामाल हो रहे हैं। Expose Now इस रिपोर्ट के जरिए खनन विभाग के उच्च अधिकारियों को चुनौती देता है कि वे सामने आएं और बताएं कि इस 70% उल्लंघन की जिम्मेदारी किसकी है?
