JJM Scam: चीफ इंजीनियर से लेकर रिटायर्ड अफसर तक… भ्रष्टाचार की ‘लाल फाइल’ में कैद हुए 9 चेहरे

जयपुर: राजस्थान के बहुचर्चित ₹900 करोड़ के जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) को बड़ी सफलता मिली है। बुधवार को एसीबी ने गिरफ्तार किए गए 9 उच्चाधिकारियों को विशिष्ट न्यायालय भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम क्रम संख्या-1 में पेश किया। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सभी आरोपियों को 3 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।

एसीबी की टीम सभी आरोपियों को एक ही गाड़ी में लेकर कोर्ट पहुंची थी। इस दौरान अधिकारियों के हाथों में लाल कपड़े में लिपटी इस घोटाले से जुड़ी अहम फाइलें मौजूद थीं, जो इस मामले की गंभीरता को दर्शा रही थीं।

कटघरे में ‘महारथी’: किन अफसरों को मिली रिमांड?

रिमांड पर लिए गए अधिकारियों में विभाग के वर्तमान और सेवानिवृत्त दिग्गज शामिल हैं। इनकी सूची और तत्कालीन पद नीचे दिए गए हैं:

नामतत्कालीन / वर्तमान पद
के.डी. गुप्ताचीफ इंजीनियर, जयपुर शहर
दिनेश गोयलतत्कालीन मुख्य अभियंता, पीएचईडी परियोजना
डी.के. गौड़रिटायर्ड तकनीकी चीफ इंजीनियर, जयपुर
निरिल कुमारतत्कालीन SE (वर्तमान चीफ इंजीनियर, चूरू)
सुशील शर्मातत्कालीन वित्तीय सलाहकार, JJM जयपुर
शुभांशु दीक्षितअतिरिक्त मुख्य अभियंता (तत्कालीन सचिव RWSSMB)
अरुण श्रीवास्तवरिटायर्ड अतिरिक्त मुख्य अभियंता, PHED
महेन्द्र प्रकाश सोनीरिटायर्ड अधीक्षण अभियंता, डीडवाना
विशाल सक्सेनातत्कालीन अधिशाषी अभियंता (वर्तमान में निलंबित)

15 ठिकानों पर छापेमारी और गिरफ्तारी का घटनाक्रम

एसीबी ने इस बड़ी कार्रवाई के लिए 17 फरवरी को देशव्यापी जाल बिछाया था। राजस्थान के जयपुर, उदयपुर, जालोर, बाड़मेर और सीकर के अलावा बिहार, झारखंड और दिल्ली सहित कुल 15 जगहों पर छापेमारी की गई थी। इस सघन जांच के बाद ही इन 9 अधिकारियों को हिरासत में लिया गया।

चीफ इंजीनियर से लेकर रिटायर्ड अफसर तक… भ्रष्टाचार की ‘लाल फाइल’ में कैद हुए 9 चेहरे

क्या है पूरा घोटाला? (The Modus Operandi)

सूत्रों के अनुसार, जल जीवन मिशन के तहत राज्य के ग्रामीण इलाकों में पीने के पानी के कनेक्शन देने के नाम पर बड़ा खेल खेला गया:

  • फर्जी बिलिंग: बिना काम हुए या आधा-अधूरा काम करके करोड़ों रुपये के फर्जी बिल पास कराए गए।
  • वित्तीय अनियमितता: बजट का बंदरबांट करने के लिए नियमों को ताक पर रखकर चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाया गया।
  • घटिया सामग्री: पाइपलाइन और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर में मानक से कम गुणवत्ता वाली सामग्री का इस्तेमाल किया गया।

अब आगे क्या?

एसीबी ने कोर्ट से 5 दिन की रिमांड मांगी थी, लेकिन अदालत ने 3 दिन की मंजूरी दी है। इस अवधि में ब्यूरो इन अधिकारियों से आमने-सामने बिठाकर पूछताछ करेगा। जांच का मुख्य केंद्र अब ठेकेदारों, नेताओं और अन्य बिचौलियों की संलिप्तता का पता लगाना है। उम्मीद है कि इस रिमांड के दौरान कई और बड़े नामों का खुलासा हो सकता है।

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