Expose Now स्पेशल:- 189 करोड़ का टेंडर और CA सर्टिफिकेट में ‘खेल’

दस्तावेजों में ‘फर्जीवाड़ा’ कर टेंडर हथियाने की साजिश करने वाली फर्म को बचाएगा कोई ‘अदृश्य’ हाथ?
-ऊर्जा सचिव आरती डोगरा की अदालत में फंसी मैसर्स ARG इलेक्ट्रिकल की किस्मत !
-डिस्कॉम में बड़े घोटाले की फाइल पर सबकी नजर !

राजस्थान के बिजली विभाग (डिस्कॉम) में भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। मैसर्स ARG इलेक्ट्रिकल प्राइवेट लिमिटेड पर RDSS योजना के तहत 189 करोड़ रुपये का टेंडर हथियाने के लिए दस्तावेजों में हेराफेरी करने के गंभीर आरोप लगे हैं। मामला अब प्रदेश की कड़क IAS और वर्तमान ऊर्जा सचिव आरती डोगरा की टेबल पर है, जिससे विभाग के गलियारों में हड़कंप मच गया है।

क्या है पूरा घोटाला?
भिवाड़ी में RDSS टेंडर के लिए डिस्कॉम ने 56.76 करोड़ रुपये का न्यूनतम ‘एनुअल टर्नओवर’ (Annual Turnover) मांगा था। लेकिन जांच में सामने आया कि ARG फर्म का असली टर्नओवर केवल 55.69 करोड़ रुपये ही था।

धोखाधड़ी की हद:-

टेंडर पाने की लालच में फर्म ने अपने CA सर्टिफिकेट से टर्नओवर वाला कॉलम ही ‘गायब’ कर दिया ताकि डिस्कॉम को कमी का पता न चले। हालांकि, डिस्कॉम प्रशासन ने UDIN पोर्टल के जरिए इस फर्जीवाड़े को पकड़ लिया और फर्म पर सख्त एक्शन लेते हुए उसे एक साल के लिए ‘डिबार’ (Debar) कर दिया और बैंक गारंटी भी जब्त कर ली।

विवादों में ‘राहत’ और नया मोड़:-

इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब पिछले दिनों RVUNL CMD देवेंद्र श्रृंगी ने प्रथम अपील के दौरान फर्म को बड़ी राहत दे दी। उन्होंने न केवल 3.78 करोड़ की बैंक गारंटी रिलीज करने के निर्देश दिए, बल्कि टर्नओवर की समीक्षा का सुझाव भी दे डाला। डिस्कॉम ने इस “नरम रुख” के खिलाफ ऊर्जा विभाग में अपील कर दी।

IAS आरती डोगरा के सामने ‘Conflict of Interest’ की चुनौती
सबसे दिलचस्प मोड़ अब आया है। जिस समय डिस्कॉम ने फर्म पर एक्शन लिया था, उस वक्त आरती डोगरा ही जयपुर डिस्कॉम की CMD थीं। अब प्रशासनिक फेरबदल के बाद वह ऊर्जा सचिव बन चुकी हैं। यानी, डिस्कॉम की अपील पर अंतिम फैसला उन्हें ही लेना है।

बड़े सवाल जो ‘Expose Now’ उठा रहा है:-

-क्या आरती डोगरा अपने ही पुराने ‘एक्शन’ वाले फैसले पर मुहर लगाएंगी या उसे बदलेंगी?

-क्या यह मामला ‘Conflict of Interest’ के दायरे में आता है?

-क्या इस प्रकरण को किसी हाई-लेवल कमेटी को भेजा जाएगा ताकि पारदर्शिता बनी रहे?

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