NCERT Controversy: ‘Exploring Society’ पुस्तक बाजार से वापस, न्यायपालिका की छवि पर उठाए थे सवाल

नई दिल्ली। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने अपनी नई सामाजिक विज्ञान पुस्तक ‘Exploring Society: India and Beyond’ को लेकर उपजे विवाद के बाद एक बड़ा कदम उठाया है। परिषद ने न केवल विवादित अध्याय को हटाने का निर्णय लिया है, बल्कि इस चूक के लिए सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी है। सुप्रीम कोर्ट की कड़ी आपत्ति के बाद इस किताब की बिक्री पर फिलहाल रोक लगा दी गई है।

क्या था विवाद?

विवाद की जड़ पुस्तक का चौथा अध्याय (Chapter IV) था, जिसका शीर्षक था— ‘The Role of Judiciary in Our Society’ (हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका)।

  • विवादित अंश: इस अध्याय में न्यायपालिका के समक्ष मौजूद चुनौतियों, जैसे भ्रष्टाचार, मामलों का भारी बैकलॉग और जजों की कमी जैसे संवेदनशील मुद्दों का विवरण दिया गया था।
  • गरिमा का प्रश्न: इन विवरणों को न्यायपालिका जैसी संवैधानिक संस्था की छवि और गरिमा को धूमिल करने वाला माना गया, जिसके बाद कानूनी और शैक्षणिक गलियारों में बहस छिड़ गई।

सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेते हुए कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी संवैधानिक संस्था की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने वाली सामग्री पाठ्यपुस्तकों में स्वीकार्य नहीं है। कोर्ट के आदेश के बाद बाजार से प्रतियों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। मामले की अगली सुनवाई 11 मार्च को तय की गई है।

NCERT की सफाई और माफी

परिषद ने एक आधिकारिक प्रेस रिलीज जारी कर अपनी गलती स्वीकार की है।

“अध्याय में ‘अनुचित टेक्स्ट और अनुमोदन में त्रुटि’ के कारण यह सामग्री गलती से शामिल हो गई थी। हमारा इरादा किसी भी संवैधानिक संस्थान की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाना नहीं था। हम इस त्रुटि के लिए ईमानदारी से माफी मांगते हैं।” — NCERT प्रेस विज्ञप्ति

छात्रों और पाठ्यक्रम पर असर

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि एनसीईआरटी की किताबें देशभर के केंद्रीय और राज्य स्कूलों में आधार का काम करती हैं। ऐन शैक्षणिक सत्र के बीच में किताब वापस लेने से शिक्षकों और छात्रों के सामने पाठ्यक्रम को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। परिषद जल्द ही अद्यतन (Updated) पाठ्यक्रम योजना पर स्पष्टीकरण जारी कर सकती है।

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