Maha Shivratri 2026: एकलिंगजी से लेकर ‘राजस्थान के अमरनाथ’ तक! महाशिवरात्रि पर जरूर जाएं इन 5 चमत्कारी शिव मंदिरों में

कल देशभर में महाशिवरात्रि (Mahashivratri 2026) का पावन पर्व मनाया जाएगा। वीरों की भूमि राजस्थान में भी शिव भक्ति की एक अलग ही बयार देखने को मिल रही है। अगर आप इस महाशिवरात्रि पर भगवान भोलेनाथ के विशेष दर्शन करना चाहते हैं, तो राजस्थान के ये 5 प्राचीन और चमत्कारी शिव मंदिर आपकी आस्था का केंद्र बन सकते हैं। इन मंदिरों की न केवल वास्तुकला अद्भुत है, बल्कि इनसे जुड़ी पौराणिक मान्यताएं भी इन्हें खास बनाती हैं।

आइए जानते हैं राजस्थान के उन 5 प्रमुख शिव मंदिरों के बारे में जहाँ महाशिवरात्रि पर लगता है भक्तों का तांता:

1. एकलिंगजी मंदिर (उदयपुर) उदयपुर से कुछ ही दूरी पर स्थित एकलिंगजी मंदिर (Eklingji Temple) मेवाड़ राजघराने के आराध्य देव का स्थान है।

  • विशेषता: यहाँ भगवान शिव चार मुखों वाले शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं।
  • मान्यता: कहा जाता है कि मेवाड़ के शासक कोई भी बड़ा कार्य करने से पहले एकलिंगजी का आशीर्वाद लेते थे। महाशिवरात्रि पर यहाँ विशेष श्रृंगार और पूरी रात भजन-कीर्तन (रात्रि जागरण) का आयोजन होता है।

2. अचलेश्वर महादेव मंदिर (माउंट आबू) अरावली की पहाड़ियों में स्थित माउंट आबू का अचलेश्वर महादेव मंदिर (Achaleshwar Mahadev) अपने रहस्यों के लिए प्रसिद्ध है।

  • विशेषता: यहाँ शिवलिंग की नहीं, बल्कि भगवान शिव के अंगूठे की पूजा की जाती है।
  • पौराणिक कथा: मान्यता है कि जब नंदीवर्धन पर्वत (माउंट आबू) डगमगाने लगा था, तब भगवान शिव ने अपने अंगूठे से ही इसे थाम लिया था।

3. परशुराम महादेव मंदिर (पाली) – ‘राजस्थान का अमरनाथ’ पाली जिले में अरावली की गुफाओं में स्थित परशुराम महादेव मंदिर (Parshuram Mahadev) को ‘राजस्थान का अमरनाथ’ कहा जाता है।

  • विशेषता: यह मंदिर एक प्राकृतिक गुफा में बना है, जहाँ पहुँचने के लिए सैकड़ों सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं।
  • इतिहास: माना जाता है कि भगवान परशुराम ने स्वयं यहाँ कठोर तपस्या की थी।

4. घुश्मेश्वर महादेव मंदिर (सवाई माधोपुर) सवाई माधोपुर के शिवाड़ में स्थित घुश्मेश्वर महादेव मंदिर (Ghushmeshwar Mahadev) का उल्लेख शिव पुराणों में भी मिलता है।

  • विशेषता: इन्हें 12वां ज्योतिर्लिंग भी माना जाता है (हालांकि इस पर अलग-अलग मत हैं)। इन्हें ‘घृष्णेश्वर’ के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है।

5. बेणेश्वर शिव मंदिर (डूंगरपुर) आदिवासियों का महाकुंभ कहे जाने वाले डूंगरपुर के बेणेश्वर धाम (Beneshwar Dham) में महाशिवरात्रि की रौनक देखते ही बनती है।

  • स्थान: यह मंदिर माही, सोम और जाखम नदियों के पवित्र त्रिवेणी संगम पर स्थित है।
  • विशेषता: यहाँ का मुख्य आकर्षण ‘स्वयंभू शिवलिंग’ है, जो स्वयं प्रकट हुआ था। महाशिवरात्रि पर यहाँ दूर-दूर से आदिवासी समाज और अन्य श्रद्धालु जलाभिषेक करने आते हैं।
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