JLF 2026: “साड़ी केवल वस्त्र नहीं, मेरा घर है”, लेखिका लक्ष्मी पुरी की पुस्तक ‘The Sari Eternal’ का विमोचन

जयपुर, जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2026 के मंच पर भारतीय संस्कृति और परिधान के एक अनूठे उत्सव का गवाह बना। यहाँ पूर्व राजनयिक और लेखिका लक्ष्मी पुरी की नई पुस्तक “द साड़ी इटरनल” (The Sari Eternal) के प्रथम संस्करण का भव्य विमोचन किया गया। इस अवसर पर जेएलएफ की सह-निदेशक नमिता गोखले और प्रसिद्ध गायिका विद्या शाह भी उपस्थित रहीं।

साड़ी के प्रति एक प्रेम-पत्र

अपनी पुस्तक के बारे में बात करते हुए लक्ष्मी पुरी भावुक नजर आईं। उन्होंने साड़ी को महज एक पोशाक मानने से इनकार करते हुए कहा, “साड़ी मेरे जीवन की साथी है। यह बिना सिला हुआ कपड़ा सिर्फ मेरे शरीर को ढकता ही नहीं, बल्कि मुझे अपने भीतर समेट लेता है। मैं इसमें रहती हूँ, यह मुझे घर जैसा अहसास देता है।” उन्होंने इस किताब को साड़ी के साथ एक संवाद, ध्यान और एक ‘प्रेम-पत्र’ की संज्ञा दी।

मां की यादों से लेकर जेन-जी (Gen-Z) तक का सफर

लक्ष्मी पुरी ने बताया कि पुस्तक का पहला अध्याय “साड़ी: माय लव अफेयर” उनके बचपन, उनकी मां और साड़ी के साथ उनके गहरे निजी जुड़ाव को समर्पित है। किताब में साड़ी की ऐतिहासिक यात्रा को भी बखूबी दर्शाया गया है:

  • ऐतिहासिक संदर्भ: प्राचीन काल के देवी-देवताओं के वस्त्रों और रानियों के पहनावे में साड़ी की भूमिका।
  • राजनीतिक पहचान: स्वतंत्रता सेनानियों से लेकर इंदिरा गांधी जैसे कद्दावर नेतृत्व की पहचान बनी साड़ी।
  • सिनेमा और कला: सत्यजीत रे की फिल्मों में साड़ी का रोमांटिक चित्रण।
  • आधुनिक दौर: लेखिका ने खुशी जताई कि आज की जेन-जी (Gen-Z) पीढ़ी के बीच भी साड़ी का क्रेज फिर से तेजी से बढ़ रहा है।

सांस्कृतिक विरासत का दस्तावेज

पुस्तक में न केवल साड़ी के बदलते स्वरूप पर प्रकाश डाला गया है, बल्कि विभिन्न धर्मों और समाजों में इसके महत्व को भी रेखांकित किया गया है। लक्ष्मी पुरी को उम्मीद है कि उनकी यह रचना पाठकों को अपनी खुद की ‘साड़ी प्रेम कहानी’ लिखने के लिए प्रेरित करेगी।

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