नई दिल्ली: देश के अन्नदाताओं की आर्थिक स्थिति को और अधिक मजबूत बनाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ‘किसान क्रेडिट कार्ड’ (KCC) योजना में बड़े बदलाव करने जा रहा है। इन बदलावों का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि किसानों को बार-बार बैंक के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और कर्ज चुकाने का भारी दबाव कम होगा।
योजना को अधिक लचीला और उपयोगी बनाने के लिए RBI ने संशोधित दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिन्हें अंतिम रूप देने के लिए 6 मार्च तक आम जनता से सुझाव मांगे गए हैं। आइए जानते हैं केसीसी में होने वाले प्रमुख बदलाव और उनके फायदे:
1. लोन चुकाने की अवधि अब 6 साल (सबसे बड़ा बदलाव)
- वर्तमान नियम: अभी KCC का ऋण 12 महीनों में चुकाना होता है, जो पूरी तरह से फसल की कटाई और बिक्री पर निर्भर करता है।
- नया प्रस्ताव: पुनर्भुगतान (Repayment) की अवधि को बढ़ाकर 6 साल तक करने का प्रस्ताव है। इससे किसान लंबे समय तक एक ही कार्ड का उपयोग कर सकेंगे और उन्हें बार-बार नया कार्ड बनवाने के झंझट से मुक्ति मिलेगी।
2. फसल की उम्र के हिसाब से मिलेगा ऋण
नई नियमावली सभी कमर्शियल, स्मॉल फाइनेंस, क्षेत्रीय ग्रामीण और को-ऑपरेटिव बैंकों पर लागू होगी। अब ऋण की सीमा और अवधि फसल के चक्र के अनुसार तय की जाएगी:
- छोटी अवधि की फसल: 12 महीने का केसीसी ऋण।
- लंबी अवधि की फसल: 18 महीने का केसीसी ऋण।
3. तकनीक और आधुनिक कृषि उपकरणों के लिए भी मिलेगा पैसा
पहले कृषि में तकनीक से जुड़े खर्चों को ऋण में शामिल नहीं किया जाता था। लेकिन नए नियमों के तहत, आधुनिक कृषि उपकरण खरीदने, सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई सिस्टम लगाने और उन्नत बीज खरीदने जैसे तकनीकी खर्चों को भी लोन की पात्रता में शामिल किया जाएगा।
4. बिना गारंटी 1.6 लाख का लोन और 50 हजार का बीमा
KCC के तहत अब किसान 1.6 लाख रुपए तक का ऋण बिना किसी गारंटी (Collateral-free) के प्राप्त कर सकते हैं। इसके साथ ही, इस योजना में 50,000 रुपए का बीमा कवर भी शामिल किया गया है, जो किसानों को एक बड़ी सामाजिक सुरक्षा प्रदान करता है।
5. सिर्फ खेती नहीं, इन कामों के लिए भी KCC
आरवी गुप्ता समिति की सिफारिशों पर 1998 में शुरू हुई यह योजना समय के साथ काफी व्यापक हो चुकी है। अब KCC का लाभ केवल फसल उत्पादन तक सीमित नहीं है। गैर-फसल आय बढ़ाने के लिए पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन (मछली पालन) के लिए भी कार्यशील पूंजी (Working Capital) दी जा रही है।
किसे मिलेगा लाभ?
यह योजना सिर्फ जमीन के मालिक किसानों तक सीमित नहीं है। छोटे और सीमांत किसान, बटाईदार (Tenant Farmers), किराए पर खेती करने वाले, किसान समूह और स्वयं सहायता समूह (SHGs) भी इस कार्ड के जरिए सस्ती दरों पर लोन ले सकते हैं।
आरबीआई के इन नए प्रावधानों के लागू होने के बाद उम्मीद है कि किसान साहूकारों के जाल से बचेंगे, बैंकिंग प्रणाली से सीधे जुड़ेंगे और उनकी आत्मनिर्भरता में भारी वृद्धि होगी।
