डॉक्टर्स फेडरेशन ने माना EXPOSE NOW का लोहा
“EXPOSE NOW टीम ने जिस संवेदनशीलता और सटीकता से चिकित्सकों के हक़ की आवाज उठाई, उसके लिए पूरा चिकित्सक वर्ग आभारी है। यह केवल एक खबर नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी जीत है। सर्विस बुक्स का DDO के पास लौटना प्रशासनिक सुधार की मिसाल है।” – डॉ. ईश्वर पंवार, प्रदेशाध्यक्ष, डॉक्टर्स वेलफेयर फेडरेशन राजस्थान

करौली। ‘सच को सामने लाने’ की ‘EXPOSE NOW’ की मुहिम का एक बार फिर बड़ा और निर्णायक असर हुआ है। करौली चिकित्सा विभाग में वर्षों से चल रही ‘अंधेरगर्दी’ पर आखिरकार राज्य सरकार ने कड़ा प्रहार किया है। ‘EXPOSE NOW’ द्वारा लगातार प्रमुखता से खबर दिखाए जाने और 181 हेल्पलाइन की पोल खोलने के बाद, करौली के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) दफ्तर में सालों से अवैध रूप से ‘कैद’ सैकड़ों चिकित्सकों की सर्विस बुक्स (Service Books) को रिहा करने के आदेश जारी हो गए हैं।
कार्यवाहक CMHO डॉ. जयंतीलाल मीणा ने लिखित में पुष्टि की है कि सर्विस बुक्स को अब संबंधित आहरण वितरण अधिकारियों (DDO) के पास भिजवाया जा रहा है। साल 2009 से एक कमरे में बंद इन फाइलों का निकलना, बेबस चिकित्सकों के लिए किसी आजादी से कम नहीं है।
सर्विस बुक्स की आड़ में ‘लूट’ का गणित
चिकित्सा विभाग के सूत्रों के अनुसार, सर्विस बुक्स को CMHO कार्यालय में रोकने का एकमात्र उद्देश्य ‘भ्रष्टाचार और ब्लैकमेलिंग’ था। सर्विस बुक न होने से चिकित्सकों के वेतन, पेंशन, प्रमोशन और मेडिकल लीव जैसे काम अटक जाते थे। सूत्रों का दावा है कि इन कामों को पास करने के एवज में हर चिकित्सक से सालभर में औसतन 12 हजार रुपये की अवैध वसूली की जाती थी। जिले के करीब 300 चिकित्सकों के हिसाब से यह आंकड़ा सालाना 36 लाख रुपये तक पहुंचता है। यह राशि अर्जेंट लीव, प्रसव अवकाश और एरियर के नाम पर ‘सुविधा शुल्क’ के रूप में ली जा रही थी।
गुढ़ाचंद्रजी घोटाला: ACS ने दिखाई सख्ती
‘EXPOSE NOW’ ने गुढ़ाचंद्रजी ब्लॉक में हुए 33 लाख रुपये के गबन और इसमें भरतपुर जेडी सुनील कुमार व CMHO की मिलीभगत का पर्दाफाश किया था। इस खबर के बाद चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर और ACS गायत्री राठौड़ ने गहरी नाराजगी जताई है। ACS ने तत्काल प्रभाव से निदेशालय स्तर के वित्तीय सलाहकार (Financial Advisor – FA) की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित की है। यह कमेटी करौली जाकर ऑडिट रिपोर्ट और अधिकारियों की मिलीभगत की जांच करेगी। माना जा रहा है कि रिपोर्ट आते ही कई बड़े अधिकारियों पर गाज गिरना तय है।

बाबू इमरान खान: CMHO का ‘गठजोड़’ बेनकाब
दलित महिला चिकित्सक को प्रताड़ित करने के आरोपी बाबू इमरान खान को बचाने में CMHO की भूमिका अब संदेह के घेरे में है। उच्चाधिकारियों के आदेश के बावजूद, CMHO जयंतीलाल मीणा ने बाबू इमरान खान को तय समय सीमा में आरोप पत्र (Charge Sheet) जारी नहीं किया। इसी देरी का फायदा उठाकर बाबू इमरान कोर्ट से स्थगन आदेश (Stay) ले आया। हैरानी की बात यह है कि कागजों में बाबू इमरान खान का डेपुटेशन दौसा जिले में है, लेकिन CMHO की मेहरबानी से वह आज भी करौली में उसी सीट पर जमकर बैठा है, जहां से वह सस्पेंड हुआ था।
