जयपुर/बांसवाड़ा | Expose Now Exclusive
राजस्थान में जल जीवन मिशन (JJM) अब ‘जल’ नहीं, बल्कि ‘भ्रष्टाचार’ का मिशन बन चुका है। ‘एक्सपोज़ नाउ’ के हाथ लगे एक्सक्लूसिव दस्तावेज़ों ने पीएचईडी (PHED) के एक और बड़े कारनामे की पोल खोल दी है। विभाग के अधिकारियों ने एक निजी फर्म के साथ मिलीभगत कर सरकारी खजाने में सेंध लगाई और बिना एक इंच पाइप बिछाए, हवा में ही करोड़ों का भुगतान कर दिया। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने इस मामले में तत्कालीन अधिशाषी अभियंता (EE) सहित 5 लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर (FIR No. 51/2026) दर्ज की है।
कागजों पर बिछी पाइपलाइन, मौके पर सब ‘गायब’
यह पूरा मामला बांसवाड़ा जिले के अरथूना ब्लॉक का है। यहां 47 गांवों की पेयजल योजना के लिए मैसर्स जी.ए. इन्फ्रा प्राइवेट लिमिटेड को 97.21 करोड़ रुपये का कार्यादेश (Work Order) दिया गया था। यहीं से शुरू हुआ भ्रष्टाचार का खेल:
- फर्जी बिलिंग: फर्म ने पाइप आपूर्ति के नाम पर 6.48 करोड़ रुपये का पहला रनिंग बिल पेश किया।
- आंख मूंदकर सत्यापन: कनिष्ठ अभियंता (JEN) नितीश उपाध्याय, पुरुषोत्तम परमार और सहायक अभियंता (AEN) श्यामलाल चरपोटा ने मौका मुआयना किए बिना और बिना भौतिक सत्यापन के ही बिल को पास कर दिया।
- तुरंत भुगतान: तत्कालीन अधिशाषी अभियंता (EE) धन्नाराम चौहान ने भी देरी नहीं की और 3,48,08,669 रुपये (3.48 करोड़) का भुगतान तुरंत फर्म के खाते में ट्रांसफर कर दिया।
ACB की जांच में खुली पोल: 3 महीने बाद पहुंचे पाइप
एसीबी की प्राथमिक जांच (PE 60/2025) में यह कड़वा सच सामने आया कि जिस दिन अधिकारियों ने भुगतान किया, उस दिन तक मौके पर एक भी पाइप नहीं पहुंचा था। पाइपों की असल सप्लाई भुगतान के तीन महीने बाद टुकड़ों में की गई। साफ है कि सरकारी धन का यह दुरुपयोग फर्म को नाजायज फायदा पहुंचाने और राजकोष को चूना लगाने की साजिश के तहत किया गया।

इन 5 ‘खिलाड़ियों’ पर कसा शिकंजा
एसीबी ने इस साजिश में शामिल निम्नलिखित लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है:
- धन्नाराम चौहान: तत्कालीन अधिशाषी अभियंता (PHED), बांसवाड़ा।
- श्यामलाल चरपोटा: तत्कालीन सहायक अभियंता, अरथूना।
- नितीश उपाध्याय: तत्कालीन कनिष्ठ अभियंता, अरथूना।
- पुरुषोत्तम परमार: तत्कालीन कनिष्ठ अभियंता, अरथूना।
- गजेंद्र अग्रवाल: मैनेजिंग डायरेक्टर, मैसर्स जी.ए. इन्फ्रा प्राइवेट लिमिटेड।
संगीन धाराओं में केस दर्ज
इन सभी आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7(c), 13(1)(a), 13(2) और भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 409 (गबन), 420 (धोखाधड़ी), 120-B (आपराधिक साजिश) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच अब अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ज्ञानप्रकाश नवल को सौंपी गई है।
