झालावाड़/नागौर | पुलिस विभाग की साख और मर्यादा को तार-तार करने वाला एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे महकमे को हिला कर रख दिया है। झालावाड़ जिले के भालता थाने में तैनात कांस्टेबल अशोक विश्नोई को अपनी ही शादी में अंतरराज्यीय तस्करों और हिस्ट्रीशीटरों को आमंत्रित करना महंगा पड़ गया। गंभीर आरोपों की पुष्टि होने के बाद जिला पुलिस अधीक्षक ने कड़ा रुख अपनाते हुए कांस्टेबल को तत्काल प्रभाव से राज्य सेवा से बर्खास्त (Dismiss) कर दिया है। यह कार्रवाई पुलिस बल की निष्पक्षता और जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए अपनाई गई ‘शून्य सहनशीलता नीति’ (Zero Tolerance Policy) के तहत की गई है।
गोपनीय शिकायत से खुला राज: 500 किमी दूर जुटे थे अपराधी

इस पूरे मामले का खुलासा एक गोपनीय शिकायत से हुआ। पुलिस को सूचना मिली थी कि 1 और 2 फरवरी 2026 को नागौर जिले में आयोजित कांस्टेबल अशोक विश्नोई के विवाह समारोह में कई कुख्यात तस्कर और सक्रिय अपराधी शामिल हुए थे। यह समारोह कांस्टेबल की तैनाती स्थल झालावाड़ से करीब 500 किलोमीटर दूर आयोजित किया गया था। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए झालावाड़ एसपी ने मामले की जांच सीओ (CO) पीड़ावा को सौंपी। जांच अधिकारी ने जब तकनीकी साक्ष्यों, मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल और अन्य दस्तावेजों को खंगाला, तो यह तथ्य स्थापित हो गया कि विवाह समारोह में कुल आठ सक्रिय अपराधी मौजूद थे। ये अपराधी केवल सामान्य मेहमान नहीं थे, बल्कि इनमें कई हिस्ट्रीशीटर और तस्करी जैसे संगीन अपराधों में लिप्त व्यक्ति शामिल थे।
मध्यप्रदेश और राजस्थान के कुख्यात तस्करों का लगा था जमावड़ा

विभागीय जांच में यह सामने आया कि समारोह में शामिल होने वाले अपराधियों का नेटवर्क काफी बड़ा था। इसमें न केवल राजस्थान बल्कि पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश के भी कई कुख्यात तस्कर और हिस्ट्रीशीटर शामिल थे। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, इन मेहमानों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट (NDPS Act), आर्म्स एक्ट, चोरी, मारपीट और अन्य गंभीर धाराओं में दर्जनों मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस के लिए यह चिंता का विषय था कि ये अपराधी सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तय कर नागौर पहुंचे और एक पुलिसकर्मी की शादी में खुलेआम शामिल हुए। यह तथ्य अपने आप में यह साबित करने के लिए काफी था कि संबंधित पुलिसकर्मी का अपराधियों के साथ गहरा और पुराना संपर्क था।
एनडीपीएस का आरोपी और जब्त संपत्ति वाला ‘पप्पू तंवर’ भी था मौजूद
जांच रिपोर्ट में एक और गंभीर खुलासा हुआ। समारोह में पप्पू तंवर नामक एक ऐसा व्यक्ति भी शामिल था, जो पुलिस की रडार पर है। पप्पू तंवर के खिलाफ वन विभाग द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा चुकी है। इतना ही नहीं, उसकी संपत्तियों को एनडीपीएस एक्ट की धारा 68F के तहत ‘अवैध अर्जित संपत्ति’ मानते हुए जब्त (Seize) किया जा चुका है। ऐसे गंभीर मामलों में लिप्त आरोपी का एक पुलिसकर्मी के निजी समारोह में बतौर मेहमान शामिल होना पुलिस आचार संहिता और सेवा नियमों का खुला उल्लंघन माना गया।
2015 में खाकी पहनी, अब आचरण ने छीनी नौकरी
बर्खास्त कांस्टेबल अशोक विश्नोई 30 दिसंबर 2015 को पुलिस सेवा में भर्ती हुआ था और वर्तमान में झालावाड़ जिले के भालता थाने में अपनी सेवाएं दे रहा था। शुरुआती वर्षों में उसका सेवा रिकॉर्ड सामान्य रहा, लेकिन हालिया घटनाक्रम ने उसके आचरण और पेशेवर जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। पुलिस विभाग ने माना कि किसी भी पुलिसकर्मी का अपराधियों के साथ इस तरह का संपर्क न केवल सेवा नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह कानून व्यवस्था के लिए भी खतरा पैदा करता है और विभाग की छवि को धूमिल करता है।
एसपी का सख्त संदेश: वर्दी की आड़ में याराना नहीं चलेगा
जिला पुलिस अधीक्षक झालावाड़ ने जांच रिपोर्ट और पक्के साक्ष्यों के आधार पर कठोर निर्णय लेते हुए अशोक विश्नोई को बर्खास्त करने का आदेश जारी किया। आदेश में स्पष्ट किया गया कि पुलिस बल का काम अपराधियों को पकड़ना है, न कि उनके साथ सामाजिक संबंध बनाना। एसपी ने कहा कि पुलिस की निष्पक्षता और जनता का विश्वास सर्वोच्च प्राथमिकता है। भविष्य में भी अनुशासन, पारदर्शिता और कानून के प्रति प्रतिबद्धता को बनाए रखा जाएगा। अपराधियों से मिलीभगत या संबंध रखने वाले किसी भी पुलिसकर्मी को बख्शा नहीं जाएगा। इस कार्रवाई से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है और इसे अनुशासन बनाए रखने की दिशा में एक नजीर के तौर पर देखा जा रहा है।
