जयपुर: जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) के अधिकारियों की कार्यशैली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जेडीए प्रशासन द्वारा करवाई गई 3 महीने की बायोमेट्रिक उपस्थिति जांच में एक बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि जेडीए के 64 अधिकारी तय 8 घंटे 30 मिनट की ड्यूटी के बजाय औसतन सिर्फ 6 से 7 घंटे ही कार्यालय में मौजूद रह रहे हैं। अधिकारी सुबह आकर हाजिरी दर्ज करते हैं और फिर दफ्तर से नदारद हो जाते हैं।
क्या है पूरा मामला?
जेडीए के अतिरिक्त आयुक्त (प्रशासन) ने 1 दिसंबर 2025 से 28 फरवरी 2026 तक 3 माह का बायोमेट्रिक उपस्थिति रिकॉर्ड निकलवाकर जांच करवाई। जेडीए का आधिकारिक कार्यालय समय सुबह 9:30 बजे से शाम 6:00 बजे तक (कुल 8 घंटे 30 मिनट) तय है। लेकिन जांच में पाया गया कि कई अधिकारी या तो दफ्तर देर से पहुँच रहे हैं या समय से पहले ही निकल रहे हैं।
प्रशासन की सख्त कार्रवाई: वेतन रोकने की चेतावनी
इस लापरवाही के उजागर होने के बाद जेडीए प्रशासन ने सभी 64 अधिकारियों को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी कर जवाब तलब किया है। जेडीए की अतिरिक्त कमिश्नर (प्रशासन) प्रिया बलराम शर्मा ने पुष्टि की है कि कुछ अधिकारियों के जवाब प्राप्त भी हो चुके हैं। प्रशासन ने सख्त चेतावनी दी है कि यदि किसी अधिकारी की मासिक औसत उपस्थिति साढ़े आठ घंटे से कम पाई गई, तो वेतन भुगतान आवश्यक कार्रवाई के बाद ही किया जाएगा।
सबसे कम उपस्थिति वाले टॉप अधिकारी
रिपोर्ट के अनुसार, सबसे कम उपस्थिति दर्ज कराने वालों में मुख्य रूप से इंजीनियरिंग विंग के अधिकारी शामिल हैं:
- अनिल कुमार वैष्णव (सहायक अभियंता): मात्र 02:49 घंटे
- अनूप कुमार गुप्ता (सहायक अभियंता): मात्र 04:29 घंटे
- पुनीत चारण (सहायक अभियंता): मात्र 04:49 घंटे
इंजीनियरिंग विंग की सफाई बनाम आमजन की परेशानी
नोटिस मिलने के बाद इंजीनियरिंग विंग के अधिकारियों में नाराजगी है। उनका तर्क है कि उनका अधिकांश काम फील्ड और साइट पर होता है, जिसके कारण उन्हें सीधे साइट पर जाना या वहीं से घर लौटना पड़ता है।
हालांकि, अधिकारियों के दफ्तर में न मिलने का सीधा खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है:
- फाइलों में देरी: नक्शा पास, जमीन रूपांतरण और पट्टा संबंधी फाइलें समय पर नहीं निपट रही हैं।
- प्रोजेक्ट्स अटके: सड़कों और कॉलोनियों के विकास कार्यों की मॉनिटरिंग धीमी पड़ गई है।
- जनता परेशान: लोगों को अपने काम के लिए जेडीए दफ्तर के बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
- शिकायतों का धीमा निस्तारण: अवैध निर्माण और अतिक्रमण से जुड़ी शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
