जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर में महिला सुरक्षा के दावों की धज्जियां उड़ाने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। जयपुर का जवाहर सर्किल थाना अब सवालों के घेरे में है, जहां एक गर्भवती महिला न्याय के लिए गुहार लगाती रही, लेकिन पुलिस की संवेदनाएं मर चुकी थीं। यहां ‘पुलिस की शह’ और ‘अपराधी बेखौफ’ वाला मंजर साफ दिखाई दे रहा है। यह मामला सिर्फ एक छेड़छाड़ का नहीं है, बल्कि पुलिस के लापरवाह सिस्टम का एक्सपोज है।

सरेराह अस्मत पर हाथ, फिर भी पुलिस चुप:-
मामला 25 मार्च की शाम करीब 6:10 बजे का है। मालवीय नगर सेक्टर 9, गिरधर मार्ग पर एक गर्भवती महिला अपने काम से जा रही थी, तभी एक सफेद रंग की गाड़ी में सवार आरोपी ने उसे अपना निशाना बनाया। आरोपी ने न केवल छेड़छाड़ की, बल्कि पीड़िता के चिल्लाने पर उसे पत्थर मारकर घायल करने की कोशिश की और फरार हो गया। पीड़िता ने अगले ही दिन 26 मार्च को जवाहर सर्किल थाने में रिपोर्ट दी। सीसीटीवी फुटेज में आरोपी की गाड़ी और उसकी पहचान साफ नजर आ रही थी, लेकिन पुलिस ने FIR दर्ज करने के बजाय मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया।
‘साहब’ पर आरोपी को थाने बुलाकर छोड़ने के आरोप:-
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब यह पता चला कि SHO आशुतोष सिंह ने आरोपी स्पा सेंटर मालिक को थाने बुलवाया था। लेकिन कानूनी कार्रवाई करने के बजाय, सांठगांठ कर उसे छोड़ दिया। जांच में सामने आया है कि यह शख्स एक ‘सीरियल मॉलेस्टर’ है। आरोपी ने 2 फरवरी को सांगानेर में दिल्ली नंबर की कार से महिला के साथ अश्लील हरकत की। 6 मार्च को पंचवटी कॉलोनी में एक और महिला को पीछे से पकड़ा और 25 मार्च को जवाहर सर्किल इलाके में गर्भवती महिला को निशाना बनाया।
मीडिया के दबाव में जागी पुलिस, 3 पर गिरी गाज:-
सोशल मीडिया ने इस घटना के सीसीटीवी फुटेज और पुलिस की लापरवाही को प्रमुखता से प्रकाशित किया, तब जाकर पुलिस मुख्यालय में हड़कंप मचा। DCP रंजीता शर्मा ने तुरंत संज्ञान लेते हुए जांच बैठाई, जिसके बाद कार्रवाई हुई। ड्यूटी ऑफिसर महेश मीणा और हेड कांस्टेबल अंगदराम मीणा को तत्काल निलंबित (Suspend) कर दिया गया है। वहीं SHO आशुतोष सिंह को गंभीर लापरवाही के लिए चार्जशीट दी गई है।

एक्सपोज नाउ के तीखे सवाल:-
-क्या जयपुर पुलिस को अब केवल मीडिया की खबरों का इंतजार रहता है एक्शन लेने के लिए?
-एक ‘सीरियल अपराधी’ को SHO ने किसके दबाव में या किस लालच में थाने से रिहा किया?
-मुख्यमंत्री के कड़े निर्देशों के बावजूद, महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों पर FIR दर्ज करने में देरी क्यों की जा रही है?
