जयपुर। राजस्थान उच्च न्यायालय ने टोंक रोड पर एयरपोर्ट प्लाजा स्कीम स्थित करीब 1500 करोड़ रुपये की 9000 वर्गमीटर जमीन के मामले में जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) को करारा झटका दिया है। एक्टिंग सीजे संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संगीता शर्मा की खंडपीठ ने जेडीए द्वारा दायर विशेष अपील को खारिज करते हुए एकलपीठ के वर्ष 2009 के आदेश को बरकरार रखा है।
अदालत का सख्त आदेश: तत्काल करें आवंटन
खंडपीठ ने जेडीए को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वह राज्य सरकार द्वारा 12 मई 2003 और 19 मई 2003 को जारी किए गए आदेशों को तत्काल प्रभाव से लागू करे। इसके तहत प्रार्थी ‘साई दर्शन होटल्स एंड मोटल्स’ के पक्ष में जमीन का आवंटन आदेश जारी करना होगा। अदालत ने माना कि एकलपीठ का फैसला सही था और प्रार्थी 15 फीसदी विकसित जमीन प्राप्त करने का विधिक अधिकारी है।
सरकार और JDA की दलीलों पर कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान जेडीए ने दलील दी कि इस जमीन का आवंटन अवैध तरीके से हुआ है और इससे सरकारी खजाने को भारी आर्थिक नुकसान होगा। जेडीए ने भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए, लेकिन खंडपीठ ने इन्हें स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा:
- राज्य सरकार अपने ही नीतिगत निर्णयों से पीछे नहीं हट सकती, खासकर तब जब प्रार्थी ने सरकार पर भरोसा कर अपने पुराने मुकदमे वापस ले लिए हों।
- “केवल कोर्ट में राशि जमा कराना भुगतान नहीं माना जा सकता।” जब तक मूल मालिकों या उनके उत्तराधिकारियों को उचित मुआवजा नहीं मिलता, तब तक प्रक्रिया अधूरी है।
- सरकार की 2001 की नीति के अनुसार, प्रभावित पक्ष 15 प्रतिशत विकसित भूमि पाने का हकदार है।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद साल 1969 से जुड़ा है जब सांगानेर तहसील की इस जमीन के अधिग्रहण की अधिसूचना जारी हुई थी। 1981 में अवार्ड पारित कर राशि कोर्ट में जमा कराई गई, लेकिन खातेदारों ने राशि बढ़ाने की मांग की जो लंबे समय तक लंबित रही। इस बीच, प्रार्थी कंपनी ने खातेदारों से भूमि अधिकार प्राप्त किए और 2003 में 15% विकसित जमीन की मांग की। सरकार ने पहले आदेश जारी किए, लेकिन 2009 में उन्हें स्थगित कर दिया था, जिसे अब कोर्ट ने अवैध माना है।
