जयपुर, राजधानी जयपुर के बजाज नगर इलाके में एक ऐसी चोरी का खुलासा हुआ है जिसकी कहानी किसी फिल्मी पटकथा जैसी सनसनीखेज है। यह मामला केवल पैसों की चोरी का नहीं, बल्कि 27 साल पुराने उस अटूट विश्वास के टूटने का है, जिसे एक परिवार ने अपने नौकर पर किया था। इंस्टाग्राम पर हुई मोहब्बत और ‘अमीर’ दिखने की चाहत ने एक वफादार नौकर को गद्दार बना दिया।
विदेश यात्रा के दौरान सूना घर बना निशाना
घटना 12 जनवरी की है, जब टोंक रोड स्थित देव नगर निवासी एक्सपोर्ट कारोबारी निखिल फतेहपुरिया अपने परिवार के साथ विदेश यात्रा पर गए थे। घर की पूरी जिम्मेदारी उनके सबसे पुराने और भरोसेमंद नौकर मंटू ठाकुर के कंधों पर थी। जब परिवार वापस लौटा, तो घर के मुख्य द्वार पर ताला लटका था, लेकिन अंदर का नजारा देख उनके होश उड़ गए। अलमारियां टूटी हुई थीं और नकदी गायब थी।
शक की सुई और 200% रिकवरी का दावा
बजाज नगर थाना प्रभारी पूनम चौधरी के नेतृत्व में जब जांच शुरू हुई, तो पुलिस को किसी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश के निशान नहीं मिले। शक सीधे मंटू ठाकुर पर गया, जो मूल रूप से बिहार का रहने वाला है। पुलिस ने जब मंटू को दबोचा और कड़ाई से पूछताछ की, तो चौंकाने वाला सच सामने आया।
- कारोबारी ने 22 लाख रुपये की चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
- आरोपी मंटू ने कुबूल किया कि उसने कुल 52.50 लाख रुपये चोरी किए थे।
- पुलिस ने आरोपी के पास से पूरी रकम बरामद कर ली है, जिसे पुलिस ‘200 प्रतिशत रिकवरी’ कह रही है।
इंस्टाग्राम, गर्लफ्रेंड और ‘अमीर’ बनने की शर्त
मंटू की गद्दारी के पीछे की वजह सोशल मीडिया थी। मंटू शादीशुदा होने के बावजूद इंस्टाग्राम पर एक युवती के प्यार में पड़ गया था। गर्लफ्रेंड ने शर्त रखी थी कि वह केवल किसी रईस व्यक्ति से ही शादी करेगी। अपनी प्रेमिका को प्रभावित करने और खुद को अमीर साबित करने के लिए मंटू ने अपने मालिक की तिजोरी साफ करने की साजिश रच डाली।
चोरी के पैसों से बनवाया मंदिर, पत्नी और प्रेमिका में बांटने की थी योजना
चोरी करने के बाद मंटू बिहार भाग गया। वहां उसने शातिराना तरीके से अपनी ‘साख’ बनाने की कोशिश की:
- धार्मिक चोला: चोरी की रकम में से करीब 7 लाख रुपये खर्च कर उसने गांव में एक मंदिर बनवा दिया।
- बंटवारे का प्लान: उसकी योजना थी कि 25 लाख रुपये अपनी पत्नी को देगा और 25 लाख रुपये अपनी प्रेमिका को, ताकि दोनों का साथ बना रहे।
- पुरानी आदत: पूछताछ में मंटू ने यह भी स्वीकारा कि वह पिछले 27 सालों से छोटी-मोटी चोरियां कर रहा था, लेकिन कभी पकड़ा नहीं गया।
पुलिस टीम की मुस्तैदी
इस हाई-प्रोफाइल केस को सुलझाने में कांस्टेबल रामावतार सिंह की तकनीकी सूझबूझ और मुखबिर तंत्र की अहम भूमिका रही। पुलिस ने 1500 किलोमीटर दूर बिहार में दबिश देकर आरोपी को गिरफ्तार किया।
