सावधान! 1 अप्रैल से बदल रहे हैं कचरा निस्तारण के नियम, चार हिस्सों में नहीं बांटा कूड़ा तो जेब होगी ढीली

जयपुर: राजस्थान के शहरी निकायों में अब ‘मर्जी’ से कचरा फेंकने का दौर खत्म होने वाला है। केंद्र सरकार द्वारा 28 जनवरी 2026 को अधिसूचित नए ठोस कचरा प्रबंधन नियमों के बाद अब आम नागरिकों से लेकर बड़ी संस्थाओं तक के लिए सख्त गाइडलाइंस जारी की गई हैं। जयपुर नगर निगम अब इन नियमों का सख्ती से पालन कराने की तैयारी में है।

चार श्रेणियों में बांटना होगा कचरा

अब तक हम कचरे को केवल ‘गीला’ और ‘सूखा’ (दो श्रेणियों) में बांटते थे, लेकिन नए नियमों के तहत इसे चार श्रेणियों में अलग-अलग करना अनिवार्य होगा:

  1. गीला कचरा: रसोई, फलों-सब्जियों के छिलके और बचा हुआ भोजन।
  2. सूखा कचरा: प्लास्टिक, कागज, धातु, कांच और लकड़ी।
  3. सैनेटरी वेस्ट: उपयोग किए गए डायपर और सैनेटरी पैड्स।
  4. हानिकारक कचरा (Hazardous): बैटरी, खराब इलेक्ट्रॉनिक्स (E-waste), दवाइयों के अवशेष और पेंट के डिब्बे।

बड़ी सोसायटियों और होटलों के लिए ‘ऑन-साइट’ निस्तारण अनिवार्य

नए नियमों में थोक अपशिष्ट जनक (Bulk Waste Generators) की परिभाषा और जिम्मेदारियों को विस्तार दिया गया है। 20,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले कार्यालयों, रिहायशी सोसायटियों, अस्पतालों, होटलों और मॉल्स को अब अपने परिसर में ही गीले कचरे से खाद बनाने या जैविक निस्तारण की व्यवस्था करनी होगी। यदि वे ऐसा नहीं करते हैं, तो उन्हें ‘प्रदूषक भुगतान सिद्धांत’ (Polluter Pays Principle) के तहत भारी हर्जाना देना होगा।

डिजिटल निगरानी और ‘स्मार्ट’ हूपर्स

पुराने मैन्युअल सिस्टम को हटाकर अब कचरा संग्रहण से लेकर निस्तारण तक की पूरी प्रक्रिया डिजिटल पोर्टल के माध्यम से ट्रैक की जाएगी।

  • हूपर की व्यवस्था: नगर निगम को अपने कचरा संग्रहण वाहनों (हूपर्स) में अलग-अलग केबिन सुनिश्चित करने होंगे।
  • ईंधन उत्पादन: सूखे कचरे से RDF (Refuse Derived Fuel) तैयार किया जाएगा, जिसे सीमेंट फैक्ट्रियों और उद्योगों में कोयले के विकल्प के रूप में इस्तेमाल करना अनिवार्य होगा।

चुनौतियां और तैयारी

हालांकि नियम 1 अप्रैल से लागू हो रहे हैं, लेकिन नगर निगम के पास वर्तमान में चार श्रेणियों में कचरा लेने की समुचित व्यवस्था नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि जुर्माने से पहले निगम को अपने इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करना चाहिए। साथ ही, कचरा बीनने वाले अनौपचारिक क्षेत्र के लोगों को भी इस नई डिजिटल व्यवस्था से जोड़ना एक बड़ी चुनौती होगी।

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