“भारतीय उत्पादों को अब मिलेगी वैश्विक पहचान”; भारत-न्यूजीलैंड FTA से कृषि निर्यात को लगेंगे पंख, किसानों की होगी ‘बल्ले-बल्ले’

नई दिल्ली: भारत की वैश्विक व्यापार नीति में एक और बड़ा अध्याय जुड़ गया है। हाल ही में भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) ने भारतीय किसानों और निर्यातकों के लिए तरक्की के नए दरवाजे खोल दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से न केवल निर्यात बढ़ेगा, बल्कि ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों को दुनिया भर में एक नई पहचान मिलेगी।

आयकर विभाग की पूर्व मुख्य आयुक्त डॉ. शिखा दरबारी ने इस समझौते को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए गेम-चेंजर बताया है। जानिए इस डील से किसे और कितना फायदा होगा:

1. इन सेक्टर्स की चमकेगी किस्मत न्यूजीलैंड में टैरिफ (आयात शुल्क) कम होने से भारतीय उत्पादों की मांग वहां तेजी से बढ़ेगी। इसका सीधा फायदा इन सेक्टर्स को मिलेगा:

  • टेक्सटाइल (कपड़ा उद्योग): भारतीय परिधानों की पहुंच आसान होगी।
  • मरीन प्रोडक्ट्स (समुद्री उत्पाद): मछली और अन्य सी-फूड का निर्यात बढ़ेगा।
  • इंजीनियरिंग और MSME: छोटे और मध्यम उद्योगों को बड़ा बाजार मिलेगा।

2. किसानों के लिए ‘जैकपॉट’ साबित होगा यह समझौता डॉ. दरबारी के अनुसार, इस FTA का सबसे बड़ा लाभ भारतीय किसानों को मिलेगा।

  • GI टैग उत्पादों को बढ़ावा: समझौते के तहत ‘जीआई टैग’ (Geographical Indication) वाले विशिष्ट कृषि उत्पादों और ‘वैल्यू-एडेड’ कृषि निर्यात को बढ़ावा दिया जाएगा।
  • बेहतर दाम: जब भारतीय उत्पाद (जैसे- आम, मसाले, बासमती चावल आदि) आसानी से न्यूजीलैंड पहुंचेंगे, तो किसानों को उनकी फसल का अंतरराष्ट्रीय मूल्य मिलेगा, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
  • सरकार की तैयारी: भारत सरकार किसानों को स्वदेशी पेटेंट और GI टैग हासिल करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है ताकि वे वैश्विक बाजार के लिए तैयार हो सकें।

3. व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुए इस 20 अरब डॉलर के दीर्घकालिक समझौते का लक्ष्य अगले 5 वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करना है। यह पीएम नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ विजन का हिस्सा है, जिसके तहत भारत को ‘ग्लोबल ट्रेड लीडर’ बनाने की तैयारी है।

4. विदेशी निवेशकों का बढ़ा भरोसा RBI के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल से अक्टूबर के बीच नेट एफडीआई (FDI) दोगुना होकर 6.2 अरब डॉलर हो गया है। इसमें से 60% से ज्यादा निवेश मैन्युफैक्चरिंग और वित्तीय सेवाओं में आ रहा है, जो यह साबित करता है कि दुनिया का भरोसा भारत पर बढ़ा है।

निष्कर्ष: भारत अब रक्षात्मक के बजाय आक्रामक और संतुलित व्यापार समझौते कर रहा है। न्यूजीलैंड के साथ हुआ यह करार भारतीय किसानों और उद्यमियों को ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर खड़ा करने में मील का पत्थर साबित होगा।

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