राजस्थान की राजधानी जयपुर, जिसे शिक्षा का हब माना जाता है, के पॉश और रिहायशी इलाकों में अवैध हॉस्टल (Hostel) और पेइंग गेस्ट (PG) का एक संगठित सिंडिकेट बेखौफ संचालित हो रहा है। रिहायशी मकानों को अवैध रूप से व्यावसायिक परिसरों में बदलकर सरकारी खजाने को करोड़ों का चूना लगाया जा रहा है। इस गंभीर मुद्दे को लेकर अब मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा तक सीधी शिकायत पहुंची है। शिकायत में शहर के हजारों अवैध हॉस्टलों और पीजी पर तत्काल सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की मांग की गई है।
रिहायशी इलाकों में कमर्शियल खेल, नियमों की उड़ रही धज्जियां

मुख्यमंत्री को भेजे गए विस्तृत ज्ञापन में बताया गया है कि जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) और नगर निगम के नियमों को ताक पर रखकर यह खेल चल रहा है। रिहायशी पट्टों वाले भूखंडों पर बिना ‘भू-उपयोग परिवर्तन’ (Land Use Change) कराए पूरी तरह से कमर्शियल गतिविधियां चलाई जा रही हैं। ये संचालक न तो कमर्शियल दरों पर बिजली-पानी का बिल भर रहे हैं और न ही सरकार को कोई टैक्स दे रहे हैं। आरोप है कि यह सब कुछ संबंधित विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से हो रहा है, जो आँखों पर पट्टी बांधे बैठे हैं।
‘मॉडल बिल्डिंग विनियम-2025’ का खुला उल्लंघन
शिकायत में राज्य सरकार द्वारा लागू किए गए ‘मॉडल बिल्डिंग विनियम-2025’ का हवाला देते हुए बताया गया है कि बड़े शहरों में हॉस्टल संचालन के लिए कड़े नियम हैं। नियमों के मुताबिक, हॉस्टल के लिए कम से कम 500 वर्ग मीटर का भूखंड होना चाहिए और वह न्यूनतम 12 मीटर चौड़ी सड़क पर स्थित होना चाहिए। लेकिन जयपुर में संकरी गलियों और छोटे भूखंडों पर बहुमंजिला हॉस्टल तान दिए गए हैं, जो न केवल अवैध हैं बल्कि हादसे को न्योता दे रहे हैं।
छात्रों को ‘भेड़-बकरियों’ की तरह रखने का आरोप
मुनाफाखोरी के लालच में छात्रों के जीवन स्तर से भी खिलवाड़ किया जा रहा है। नियमों के अनुसार, हॉस्टल में प्रति छात्र/व्यक्ति कम से कम 8 वर्ग मीटर का रहने योग्य क्षेत्र (Habitable Room Area) होना अनिवार्य है। इसके अलावा, हॉस्टल के कुल क्षेत्रफल का 15% हिस्सा कॉमन सुविधाओं जैसे डाइनिंग एरिया, किचन, लाइब्रेरी और इंडोर गेम्स के लिए आरक्षित रखना होता है। शिकायत में दावा किया गया है कि जयपुर के अधिकांश पीजी और हॉस्टल इन मानकों को पूरा नहीं करते और छात्रों को बेहद संकरे कमरों में ठूंसा जा रहा है।
सुरक्षा मानकों से खिलवाड़: फायर NOC और फूड लाइसेंस नदारद
शहर के अधिकांश पीजी और हॉस्टलों के पास फायर एनओसी (Fire NOC) तक नहीं है। आगजनी की घटना होने पर यहां से निकलने का कोई सुरक्षित रास्ता नहीं है। इसके अलावा, छात्रों को परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता जांचने वाला FSSAI लाइसेंस भी इन संचालकों के पास नहीं है। बिना ट्रेड लाइसेंस के चल रहे इन संस्थानों पर प्रशासन का कोई नियंत्रण नहीं है।
अपराधियों और नशे के सौदागरों की शरणस्थली
मामले का सबसे खतरनाक पहलू सुरक्षा से जुड़ा है। शिकायतकर्ता ने बताया कि पीजी और हॉस्टल की आड़ में पुलिस वेरिफिकेशन (Police Verification) की प्रक्रिया को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है। इसका फायदा उठाकर आपराधिक किस्म के लोग, ड्रग्स तस्कर और सट्टा कारोबारी इन जगहों पर पनाह ले रहे हैं। बिना पहचान के रह रहे ये तत्व बेखौफ होकर स्मैक, अफीम और गांजे का व्यापार कर रहे हैं और पुलिस की रडार से बचे रहते हैं।
एक-एक मालिक के पास 15-15 हॉस्टल, टैक्स चोरी का बड़ा खेल
शिकायत में एक बड़े ‘नेक्सस’ का पर्दाफाश किया गया है। कुछ बड़े व्यापारी 15-15 हॉस्टल और पीजी चला रहे हैं, लेकिन वे इनकम टैक्स और जीएसटी (GST) के दायरे से बाहर हैं। वे न तो रजिस्ट्रेशन करवाते हैं और न ही सरकार को टैक्स देते हैं। यह पूरा सिंडिकेट करोड़ों रुपये की काली कमाई कर रहा है और सरकारी राजस्व (राजकोष) को भारी नुकसान पहुंचा रहा है।
इन इलाकों में सबसे ज्यादा सक्रिय है माफिया
जयपुर के लगभग हर प्रमुख इलाके में यह धंधा फैला हुआ है। शिकायत में विशेष रूप से मालवीय नगर, प्रताप नगर, जगतपुरा, पृथ्वीराज नगर, विद्याधर नगर, लाल कोठी, गुर्जर की थड़ी, श्याम नगर, महेश नगर, गोपालपुरा, दुर्गापुरा, बापू नगर, वैशाली नगर, राजापार्क और सी-स्कीम जैसे क्षेत्रों को चिन्हित किया गया है। यहां रिहायशी मकानों और फ्लैटों में अवैध रूप से हॉस्टल संचालित हो रहे हैं।
सीलिंग और ध्वस्तीकरण की मांग
शिकायत में राज्य सरकार से मांग की गई है कि ऐसे सभी अवैध हॉस्टल और पीजी को चिन्हित कर उनके खिलाफ सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाए। साथ ही, ‘मॉडल बिल्डिंग विनियम-2025’ की पालना सुनिश्चित करवाई जाए और दोषी अधिकारियों व संचालकों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत मुकदमा दर्ज किया जाए।
शिकायतकर्ता एडवोकेट चंद्रशेखर कच्छावा ने 31 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, नगरीय विकास मंत्री, आयकर आयुक्त और जयपुर पुलिस कमिश्नर समेत तमाम उच्च अधिकारियों को यह विस्तृत परिवाद (शिकायत) भेजा है और तत्काल प्रभाव से कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
