नई दिल्ली: देश में दूध और डेयरी उत्पादों में बढ़ती मिलावट की गंभीर शिकायतों के बाद भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने बड़ा कदम उठाया है। प्राधिकरण ने देशभर में बिना लाइसेंस या पंजीकरण के दूध बेचने पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी है। इस संबंध में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खाद्य सुरक्षा आयुक्तों को सख्त एडवाइजरी जारी कर दी गई है।
लाइसेंस अनिवार्य, होगी कड़ी कार्रवाई
FSSAI द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, अब कोई भी व्यक्ति या संस्था बिना वैध लाइसेंस या पंजीकरण के दूध का उत्पादन, संग्रहण या बिक्री नहीं कर सकेगा। यह फैसला हाल ही में आंध्र प्रदेश में संक्रमित दूध पीने से हुई 13 लोगों की मौत और कई लोगों के अस्पताल में भर्ती होने जैसी दर्दनाक घटनाओं के मद्देनजर लिया गया है। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पशुपालकों और डेयरी सहकारी समितियों को राहत
इस नई नीति में छोटे किसानों और पशुपालकों का विशेष ध्यान रखा गया है। एडवाइजरी के मुताबिक, जो किसान या पशुपालक किसी रजिस्टर्ड डेयरी सहकारी समिति से जुड़े हैं और उन्हें दूध की आपूर्ति करते हैं, उन्हें व्यक्तिगत रूप से अलग से लाइसेंस लेने की आवश्यकता नहीं होगी। यह छूट केवल उन्हीं के लिए है जो सहकारी ढांचे के भीतर काम कर रहे हैं।
चलेगा विशेष जांच अभियान
FSSAI ने अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में विशेष जांच और पंजीकरण अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, दूध के भंडारण के लिए इस्तेमाल होने वाले कूलिंग उपकरणों और फ्रीजर के नियमित निरीक्षण की बात भी कही गई है, ताकि दूध को सही तापमान पर स्टोर किया जा सके और उसकी गुणवत्ता बनी रहे। प्राधिकरण का मुख्य उद्देश्य लोगों की सेहत के साथ होने वाले खिलवाड़ को रोकना और स्वच्छ दूध की आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
