DGFT साइबर सेंधमारी: उद्योगपतियों की ID हैक कर 400 करोड़ की ठगी, जयपुर पुलिस ने जोधपुर से दबोचे 5 जालसाज

राजस्थान की जयपुर साइबर सेल ने देश के संभवतः सबसे बड़े और पहले डिजिटल सिग्नेचर (DSC) घोटाले का पर्दाफाश किया है। शातिर ठगों ने डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) के पोर्टल में सेंध लगाकर देश के बड़े उद्योगपतियों के खातों से करीब 400 करोड़ रुपये की ड्यूटी क्रेडिट स्क्रिप्स (डिजिटल मुद्रा) पार कर दी। पुलिस ने इस मामले में जोधपुर और पाली से 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि गिरोह का मुख्य सरगना अभी फरार है।

जोधपुर से पकड़े गए 5 आरोपी

पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में निर्मल सोनी कंटालिया (पाली), सुल्तान, नंदकिशोर, अशोक भंडारी और प्रमोद खत्री (सभी जोधपुर निवासी) शामिल हैं। इन आरोपियों के खिलाफ बीएनएस (BNS) और आईटी एक्ट की 24 गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।

ऐसे हुआ ‘महाठगी’ का खुलासा

इस पूरे घोटाले की कड़ी दिसंबर 2025 में तब खुली जब उद्योगपति सौरभ बाफना ने शिकायत दर्ज कराई। उनके ‘ICEGATE’ पोर्टल से 17.88 लाख की स्क्रिप्स गायब होकर किसी अज्ञात ‘म्यूल अकाउंट’ में ट्रांसफर हो गई थीं। जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि उनके अकाउंट से अब तक कुल 93 लाख रुपये की स्क्रिप्स चोरी हो चुकी हैं। जब साइबर सेल ने गहराई से पड़ताल की, तो यह आंकड़ा 400 करोड़ के पार निकल गया।

दुबई कनेक्शन: कैसे काम करता था यह गिरोह?

स्पेशल सीपी ओम प्रकाश के अनुसार, यह गिरोह बेहद शातिर तरीके से काम करता था:

  1. प्रोफाइल हैकिंग: ठगों ने फर्जी आधार और पैन कार्ड का इस्तेमाल कर उद्योगपतियों की डिजिटल सिग्नेचर अथॉरिटी तक पहुंच बनाई।
  2. ID में बदलाव: DGFT अकाउंट में लॉग-इन कर असली मालिकों के ईमेल और मोबाइल नंबर बदलकर अपना एक्सेस जमा लिया।
  3. फर्जी DSC: इन नंबरों के जरिए 400 से ज्यादा फर्जी डिजिटल सिग्नेचर बनाए गए।
  4. दुबई से ऑपरेशन: पुलिस से बचने के लिए ये फर्जी सिग्नेचर दुबई में डाउनलोड किए जाते थे और वहीं से विदेशी सर्वर के जरिए खातों को ऑपरेट किया जाता था।
  5. पैसों का खेल: हैक किए गए खातों से ‘ड्यूटी क्रेडिट स्क्रिप्स’ को म्यूल अकाउंट्स में डाला जाता और फिर दिल्ली-यूपी के एजेंटों के जरिए अन्य व्यापारियों को सस्ते दाम पर बेचकर नकदी (हवाला के जरिए) वसूली जाती थी।

ड्यूटी क्रेडिट स्क्रिप्स क्या हैं?

यह एक प्रकार की ‘डिजिटल करेंसी’ है जो सरकार निर्यातकों (Exporters) को प्रोत्साहन के रूप में देती है। इसका उपयोग सीमा शुल्क (Customs Duty) चुकाने में किया जाता है। ठगों ने इसी ‘डिजिटल मनी’ को निशाना बनाया।

जांच के लिए बनी स्पेशल टीम

इस हाई-प्रोफाइल मामले की गंभीरता को देखते हुए 3 IPS अधिकारियों के सुपरविजन में 20 साइबर एक्सपर्ट्स की टीम तैनात की गई है। इस कांड ने डिजिटल सिग्नेचर अथॉरिटी और सरकारी पोर्टल्स के बीच सुरक्षा की बड़ी खामी को उजागर किया है, जिसके बाद डीजीएफटी और आई 4C (I4C) सहित तमाम केंद्रीय एजेंसियों को अलर्ट जारी कर दिया गया है।

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