बाड़मेर। राजस्थान के बाड़मेर जिले में ‘जल संचय जन भागीदारी अभियान’ के तहत किए गए कार्यों की पारदर्शिता अब सवालों के घेरे में है। मामला तब गरमाया जब जिला प्रशासन द्वारा 91,000 से अधिक टांकों के निर्माण का दावा कर जिला कलेक्टर टीना डाबी के लिए ‘राष्ट्रपति पुरस्कार’ प्राप्त किया गया, लेकिन जब एक जागरूक नागरिक ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत इन लाभार्थियों का विवरण मांगा, तो प्रशासन ने सूचना देने के बजाय आवेदन को विभागों के बीच घुमाना शुरू कर दिया और अंततः उसे निरस्त कर दिया।
क्या है पूरा मामला? जानकारी के अनुसार, 08 जनवरी 2026 को आरटीआई की धारा 2(j)(1) एवं 6(1) के तहत अतिरिक्त जिला कलेक्टर बाड़मेर को एक आवेदन प्रस्तुत किया गया था। इसमें ‘जल संचय जन भागीदारी अभियान’ के तहत निर्मित 91,000 टांकों के लाभार्थियों के नाम, पते और निर्माण स्थलों के दस्तावेजों के प्रत्यक्ष अवलोकन की मांग की गई थी।
विभागों का ‘पास-द-पार्सल’ खेल हैरानी की बात यह है कि जिला कलेक्टर कार्यालय ने यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया कि संबंधित रिकॉर्ड उनके पास उपलब्ध नहीं हैं। 12 जनवरी 2026 को आवेदन जिला परिषद को भेजा गया, वहां से इसे वाटरशेड विभाग (WCDC) को हस्तांतरित किया गया और अंत में वाटरशेड विभाग ने बिना किसी ठोस कानूनी आधार के आवेदन को सीधे निरस्त कर दिया।
पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न जब इन 91,000 टांकों के निर्माण का आंकड़ा भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय को भेजा गया और उसी के आधार पर सर्वोच्च सम्मान प्राप्त किया गया, तो प्रश्न यह उठता है कि मस्टर रोल, जीपीएस लोकेशन, भुगतान विवरण और पूर्णता प्रमाण पत्र जैसे मूल दस्तावेज आखिर हैं कहां?
जनता की मांग: सार्वजनिक हो सूची बाड़मेर के नागरिकों का कहना है कि वे इस योजना के वास्तविक हितधारक हैं और उन्हें एक-एक पैसे का हिसाब जानने का संवैधानिक अधिकार है। नागरिकों ने मांग की है कि 06 सितंबर 2024 से लेकर अब तक निर्मित सभी टांकों का ग्रामवार और लाभार्थीवार विवरण सार्वजनिक किया जाए। यदि प्रशासन सूचना छिपा रहा है, तो यह संदेह गहराता है कि उपलब्धियां वास्तविक न होकर केवल कागजी हैं।
