अलवर: अलवर के ढेलावास स्कूल के शिक्षक बड्डन लाल बलाई की आत्महत्या के मामले में प्रशासन अब सख्त रुख अपना रहा है। 9 फरवरी को जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। इस दौरान परिजनों और ग्रामीण समुदायों में भारी आक्रोश देखा गया, जिसके बाद पुलिस ने निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है।
लेटेस्ट अपडेट :
- जांच दल का गठन: जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने इस मामले की जांच के लिए एक तीन सदस्यीय कमेटी (SIT) गठित की है। यह कमेटी स्कूल के रिकॉर्ड, उपस्थिति पंजिका और सुसाइड नोट में वर्णित “एक्सेसिव वर्कलोड” की सत्यता की जांच करेगी।
- नामजदगी और पूछताछ: सुसाइड नोट में स्पष्ट रूप से प्रिंसिपल सुनीता बाई, गायत्री जी, ए.के. मिश्रा और साथी शिक्षकों प्रत्येकेंद्र सिंह, रोशन लाल व सीमा गुप्ता का नाम शामिल है। पुलिस इन सभी से पूछताछ के लिए नोटिस जारी करने की तैयारी कर रही है।
- FSL जांच: 4 पन्नों के मार्मिक सुसाइड नोट को विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) भेजा गया है ताकि यह पुष्टि हो सके कि यह मृतक की ही लिखावट है।
सिस्टम की संवेदनहीनता: ‘600 छुट्टियां’ थीं, फिर भी नहीं मिली राहत
जांच में यह बेहद चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि बड्डन लाल के खाते में 600 हाफ पे लीव (HPL) जमा थीं। इसके बावजूद उन्हें रिटायरमेंट से पहले अपने स्वास्थ्य की देखभाल और कागजी कार्रवाई के लिए छुट्टी नहीं दी गई।
- अकेलापन: नोट के अनुसार, स्कूल के अन्य प्रभावी शिक्षकों ने अपनी ड्यूटी रसूख के दम पर दूसरी जगह लगवा ली थी, जिससे सारा बोझ (8 स्कूलों का चार्ज) बीमार बड्डन लाल पर आ गया।
- अंतिम संदेश: शिक्षक ने अंत में लिखा था— “मैं चार्ज कब देता और रिटायरमेंट के कागज कब बनाता… दोषियों को कड़ी सजा मिले।”
पुलिस का पक्ष
अकबरपुर थानाधिकारी सीमा सिंसिनवार ने बताया कि परिजनों की रिपोर्ट के आधार पर आत्महत्या के लिए उकसाने और अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस यह भी जांच रही है कि क्या स्कूल में शिक्षकों के बीच आपसी गुटबाजी और जातिगत प्रताड़ना का भी कोई कोण है।
