अलवर। राजस्थान के वन विभाग के चर्चित अलवर-राजगढ़ पौधारोपण घोटाले में एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल सामने आया है। करीब 17 करोड़ रुपये के गबन के इस मामले में, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (HoFF) पवन कुमार उपाध्याय ने 16 मार्च 2026 को एक आदेश जारी कर मौजूदा जांच अधिकारी राजीव चतुर्वेदी को अचानक जांच से हटा दिया है। अब उनकी जगह संभागीय मुख्य वन संरक्षक, जयपुर को नया प्रारंभिक जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है।
15 महीने की जांच पर लगा ब्रेक
इस बड़े घोटाले में तत्कालीन HoFF अरिजित बनर्जी ने 4 दिसंबर 2024 को आईएफएस (IFS) अधिकारी राजीव चतुर्वेदी को जांच अधिकारी नियुक्त किया था। 15 महीने तक चली लंबी जांच के बाद अब अचानक जांच अधिकारी बदलने से पूरी प्रक्रिया पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। मुख्यालय से जारी आदेश के अनुसार, अब अलवर वन मंडल की राजगढ़ रेंज के 11 कार्यस्थलों (650 हेक्टेयर) और 7 ग्राम वन सुरक्षा समितियों से जुड़ी अनियमितताओं की जांच अब नए सिरे से होगी।
पुराने तबादले का दिया गया हवाला
वर्तमान HoFF पवन कुमार उपाध्याय ने राजीव चतुर्वेदी को हटाने के पीछे तर्क दिया है कि उनका तबादला 21 नवंबर 2025 को ही राजस्थान जैव विविधता बोर्ड, जयपुर में सदस्य सचिव के पद पर हो गया था। हालांकि, विभाग में यह चर्चा का विषय है कि यदि तबादला नवंबर में हुआ था, तो उन्हें 4 महीने बाद अब मार्च में जांच से क्यों हटाया गया?
बड़ा सवाल: जांच में देरी की आशंका
आदेश की टाइमिंग सवालों के घेरे में है। जानकारों का मानना है कि अचानक जांच अधिकारी बदलने से 17 करोड़ के इस बड़े गबन मामले की जांच में भारी देरी हो सकती है। राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित खबर के अनुसार, इस बदलाव के बाद अब भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई की गति प्रभावित होने का अंदेशा जताया जा रहा है।
