जयपुर: राजस्थान की स्थापना के ऐतिहासिक मुहूर्त और सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देते हुए इस वर्ष 19 मार्च को ‘राजस्थान दिवस’ पूरे प्रदेश में अभूतपूर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने घोषणा की है कि राज्य की गौरवशाली परंपराओं को पुनर्जीवित करने के लिए इस दिन को भारतीय नववर्ष (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा) के अनुसार मनाने का निर्णय लिया गया है।
ऐतिहासिक मुहूर्त का महत्व:
मुख्यमंत्री ने बताया कि 30 मार्च 1949 को लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के नेतृत्व में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के पावन अवसर पर, रेवती नक्षत्र और इंद्रयोग के शुभ मुहूर्त में ‘वृहद् राजस्थान’ की स्थापना हुई थी। इसी ऐतिहासिक महत्व को अक्षुण्ण रखने के लिए इस वर्ष 19 मार्च को राज्य स्तरीय कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।
स्वच्छता से समृद्धि का संकल्प:
राजस्थान दिवस के भव्य आयोजनों की शुरुआत ‘स्वच्छता कार्यक्रम’ के साथ हो चुकी है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य राजस्थान को केवल आर्थिक रूप से ही नहीं, बल्कि स्वच्छता और स्वास्थ्य के मानकों पर भी देश का अग्रणी राज्य बनाना है। उन्होंने कहा कि हमारे महल, किले, झीलें और रेगिस्तान विश्वभर के पर्यटकों को आकर्षित करते हैं, और स्वच्छता इस आकर्षण को और अधिक बढ़ाएगी।
विविधता में एकता का प्रतीक:
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि राजस्थान वह भूमि है जहाँ कदम-कदम पर विविधता है, फिर भी यहाँ की एकता और सांस्कृतिक समृद्धि इसे दुनिया में अद्वितीय बनाती है। 19 मार्च को होने वाले आयोजनों में प्रदेश की लोक कलाओं और ऐतिहासिक गौरव का प्रदर्शन किया जाएगा।
