‘फिट’ होकर भी बने दिव्यांग, हाड़ौती के 4 जिलों में 23 जालसाजों ने सिस्टम को लगाया चूना; UP से भी जुड़े तार

राजस्थान में सरकारी नौकरी पाने के लिए ‘फर्जी दिव्यांग’ (Fake Disability) सर्टिफिकेट बनवाने का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। एसओजी (SOG) द्वारा हाल ही में 44 कर्मचारियों पर एफआईआर दर्ज करने के बाद, अब हाड़ौती संभाग (कोटा, बारां, झालावाड़ और बूंदी) में एक और बड़ा भंडाफोड़ हुआ है। दैनिक भास्कर की एक विस्तृत पड़ताल में सामने आया है कि 23 ऐसे कर्मचारी हैं जो बिल्कुल फिट हैं, लेकिन फर्जी सर्टिफिकेट के दम पर सालों से सरकारी नौकरी कर रहे हैं।

0% दिव्यांगता, फिर भी ले ली नौकरी

खुलासे में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से 2 कर्मचारी ऐसे हैं जिनकी श्रवण शक्ति (सुनने की क्षमता) बिल्कुल सामान्य है (0% दिव्यांगता), लेकिन उन्होंने अपने सर्टिफिकेट में इसे 40% से अधिक बताया है। बाकी 21 कर्मचारियों की वास्तविक दिव्यांगता भी 40% से काफी कम है, जो कानूनन सरकारी नौकरी में दिव्यांग कोटे के पात्र नहीं हैं। इन 23 में से 4 कर्मचारी हाल ही में नियुक्त हुए हैं, जबकि 19 कर्मचारी पिछले 1 से लेकर 13 साल से अपनी ‘फर्जी’ नौकरी के मजे लूट रहे हैं।

यूपी से भी बनवा कर लाए सर्टिफिकेट

इस फर्जीवाड़े के तार अन्य राज्यों से भी जुड़े हुए हैं। कई अभ्यर्थियों ने उत्तर प्रदेश (जैसे आजमगढ़) से अपने फर्जी सर्टिफिकेट बनवाए और राजस्थान के विभागों (जैसे कोटा थर्मल, कृषि विभाग, शिक्षा विभाग) में नौकरी हासिल कर ली।

पड़ताल में सामने आए कुछ प्रमुख नाम और उनकी हकीकत:

  • भंवर लाल सैनी (लाइब्रेरियन, शिक्षा विभाग): नई नियुक्ति। सर्टिफिकेट बूंदी से बना। पहले 45% श्रवण शक्ति दोष बताया, जांच में 0% निकला।
  • संदीप कुमार (शिक्षक, बारां): 2023 में नियुक्ति। सर्टिफिकेट भरतपुर से बना। पहले 41% श्रवण दोष, अब 0%
  • सुरेश कुमार यादव (JEN, कोटा थर्मल): 2021 में नियुक्ति। सर्टिफिकेट आजमगढ़ (यूपी) से। अस्थि दिव्यांगता पहले 60%, अब मात्र 24%
  • अयाज बेग (लाइब्रेरियन): नई नियुक्ति। बारां से सर्टिफिकेट। अस्थि दिव्यांगता 40% से घटकर 20%
  • राजमल मेहता (वरिष्ठ कृषि पर्यवेक्षक, बारां): 2015 से नौकरी। अंधता 40% बताई, हकीकत में 30%
  • नीरज पाटीदार (कृषि पर्यवेक्षक, कोटा): 2020 में नियुक्ति। झालावाड़ से सर्टिफिकेट। अंधता 55% से घटकर 30% रह गई।
  • अरुण कुमार मेहता (कृषि पर्यवेक्षक): नई नियुक्ति। मानसिक दिव्यांगता पहले 60%, अब 40% से कम

इनके अलावा जितेन्द्र कुमार शर्मा (पशु परिचर), रामदयाल डांगी (कृषि पर्यवेक्षक), गिरिराज सैनी (व्याख्याता), कन्हैया लाल मीणा (वरिष्ठ अध्यापक), मनोज कुमार माथुर (व्याख्याता) और आशीष मीणा (थर्ड ग्रेड शिक्षक) के नाम भी इस फर्जीवाड़े की लिस्ट में शामिल हैं, जिनकी वास्तविक दिव्यांगता तय मानकों (40%) से कम पाई गई है।

अब आगे क्या?

इन सभी कर्मचारियों के दस्तावेज मीडिया की पड़ताल में सामने आ चुके हैं। जिस तरह से दो दिन पहले एसओजी ने 44 अन्य कर्मचारियों पर शिकंजा कसा था, अब इन 23 कर्मचारियों पर भी गाज गिरना लगभग तय माना जा रहा है। इस खुलासे ने सिस्टम की कार्यप्रणाली और मेडिकल बोर्ड की जांच पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Share This Article
Leave a Comment