केरल उच्च न्यायालय ने भ्रष्टाचार के मामलों में सरकारी अधिकारियों को एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच प्रदान किया है। न्यायमूर्ति ए. बदरुद्दीन की पीठ ने ‘अनाज़ एम.ए. बनाम केरल राज्य’ मामले में फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act) के तहत किसी लोक सेवक के खिलाफ जांच शुरू करने के लिए सक्षम प्राधिकारी की पूर्व मंजूरी (Sanction) अनिवार्य है।
मुख्य जानकारी:
- मामले की पृष्ठभूमि: याचिकाकर्ता, जो सहायक वन संरक्षक के पद पर कार्यरत हैं, के खिलाफ एक निजी शिकायत पर निचली अदालत ने बिना मंजूरी के पुलिस जांच और एफआईआर का आदेश दिया था।
- अदालत का आदेश: हाईकोर्ट ने निचली अदालत के जांच संबंधी आदेश (Ext.P3) और उसके आधार पर दर्ज एफआईआर (Ext.P4) को अवैध मानते हुए रद्द कर दिया है।
- नया निर्देश: अदालत ने कहा कि यदि शिकायतकर्ता आगे बढ़ना चाहता है, तो उसे पहले अधिनियम की धारा 19(1) के तहत आवश्यक मंजूरी प्राप्त करनी होगी।
2. हिमाचल हाईकोर्ट का निर्देश: जब्त की गई नकदी को जल्द लौटाए पुलिस
शिमला: हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने एक अहम फैसले में कहा है कि पुलिस को जब्त की गई कीमती वस्तुओं और नकदी को जरूरत से ज्यादा समय तक अपनी कस्टडी में नहीं रखना चाहिए। न्यायमूर्ति विपिन चंद्र नेगी ने ‘निशांत सरीन बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य’ मामले में याचिकाकर्ता के घर से बरामद नकदी को वापस करने का आदेश दिया है।
मुख्य जानकारी:
शर्तें: कोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को यह नकदी उचित बांड और सुरक्षा (Security) जमा करने के बाद लौटा दी जाए। साथ ही, साक्ष्य की शुद्धता बनाए रखने के लिए याचिकाकर्ता को जब्त नोटों की तस्वीरों और इन्वेंट्री पर हस्ताक्षर करने होंगे।
जब्त करेंसी: याचिकाकर्ता के घर से 2,000 रुपये के 300 नोटों सहित अन्य नकदी बरामद की गई थी, जिसे पुलिस के मालखाने में रखा गया था।
सुप्रीम कोर्ट का हवाला: अदालत ने ‘सुंदरभाई अंबालाल देसाई’ मामले के सिद्धांतों को लागू करते हुए कहा कि जांच के लिए नोटों की केवल फोटो और इन्वेंट्री ही पर्याप्त साक्ष्य हो सकते हैं।
