जयपुर | राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने रविवार को जयपुर में आयोजित एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में स्पष्ट किया कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब खनिज उद्योग का विकास श्रमिकों की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के साथ संतुलित होगा। वे एक निजी होटल में माइनिंग इंजीनियर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (MEAI) के राजस्थान चैप्टर द्वारा आयोजित “विजन 2047- माइनिंग एंड मिनरल्स पर्सपेक्टिव” विषयक सेमिनार को संबोधित कर रहे थे।
खनिज और खनिक: दोनों की सुरक्षा प्राथमिकता
राज्यपाल ने अपने संबोधन में ‘सबका साथ, सबका विकास’ की संकल्पना को खनन क्षेत्र में भी लागू करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि खनिज उद्योग देश की आर्थिक रीढ़ है, लेकिन इसमें कार्यरत श्रमिकों की अनदेखी नहीं की जा सकती। राज्यपाल ने निर्देश दिए कि खनन श्रमिकों की स्वास्थ्य सुरक्षा, उनका बीमा और अन्य कल्याणकारी सुविधाओं को प्राथमिकता में रखा जाए। सुरक्षित खनन (Safe Mining) केवल एक नियम नहीं, बल्कि एक नैतिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
पारंपरिक और आधुनिक तकनीक का हो संगम
बागडे ने माइनिंग इंजीनियर्स का आह्वान किया कि वे देश की आर्थिक समृद्धि के लिए प्रभावी रणनीतियां बनाएं। उन्होंने सुझाव दिया कि भारत की पारंपरिक खनन प्रौद्योगिकी और आज की आधुनिक डिजिटल तकनीक का समन्वय करके ही हम सतत विकास (Sustainable Development) का लक्ष्य हासिल कर सकते हैं।
गरीबी उन्मूलन और डिजिटल भारत की चर्चा
विकसित भारत के रोडमैप पर बात करते हुए राज्यपाल ने कहा कि देश डिजिटल तकनीक में तेजी से आगे बढ़ रहा है। केंद्र सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने बताया कि सामाजिक सुधार और गरीबी उन्मूलन की दिशा में ऐतिहासिक कार्य हुए हैं। देश में 80 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज की सुविधा मिल रही है और करीब 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से ऊपर आए हैं।
‘गौपालन हो रहा है, नंदी की उपेक्षा क्यों?’
कार्यक्रम के अंत में राज्यपाल ने एक सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दे पर भी सबका ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि राजस्थान में गौपालन (गाय संरक्षण) पर तो बहुत अच्छा काम हो रहा है, लेकिन नंदी (बैल) की उपेक्षा चिंताजनक है। उन्होंने उपस्थित लोगों से आह्वान किया कि आगामी महाशिवरात्रि के पर्व पर नंदी संरक्षण के लिए भी विशेष कार्य किए जाएं।
इस अवसर पर राज्यपाल ने खनन क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले विशिष्टजनों को सम्मानित भी किया।
