Rajasthan High Court: युवा वकीलों को मिली बड़ी राहत, कानून की किताबें खरीदने के लिए मिलेंगे 5000 रुपये, जानिए शर्तें

जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदेश के संघर्षरत युवा वकीलों (Junior Advocates) के लिए एक संवेदनशील और बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने बार एसोसिएशनों को निर्देश दिए हैं कि वे वकालत के पेशे में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहे नए वकीलों को कानून की किताबें खरीदने के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करें। हाईकोर्ट ने 28 साल तक के उन वकीलों को 5000 रुपये की एकमुश्त सहायता देने का आदेश दिया है, जिनकी वकालत को अभी 5 साल पूरे नहीं हुए हैं.

क्या है ‘राजस्थान एडवोकेट्स एड टू परचेज लॉ बुक्स स्कीम’?

जस्टिस अनूप ढंड ने एक मोटर दुर्घटना अपील पर सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया। उन्होंने प्रदेश की सभी बार एसोसिएशनों को ‘राजस्थान एडवोकेट्स एड टू परचेज लॉ बुक्स स्कीम’ (Rajasthan Advocates Aid to Purchase Law Books Scheme) तैयार करने को कहा है.

  • पात्रता: वकील की उम्र 28 वर्ष तक हो और वकालत का अनुभव 5 वर्ष से कम हो.
  • प्रक्रिया: सभी जिलों में एक ‘खरीद समिति’ (Purchase Committee) का गठन किया जाएगा.
  • भुगतान: ‘पहले आओ-पहले पाओ’ (First Come, First Served) के आधार पर पात्र वकीलों को राशि वितरित की जाएगी.

नियम सख्त: बिल पेश करना जरूरी, दुरुपयोग पर लगेगा ब्याज हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यह राशि केवल किताबों के लिए है।

  1. बिल अनिवार्य: राशि लेने के एक माह के भीतर वकील को किताबों का बिल पेश करना होगा.
  2. वापसी: यदि वकील पुस्तकें नहीं खरीद पाता है, तो उसे दी गई राशि वापस करनी होगी.
  3. जुर्माना: यदि राशि का उपयोग किसी दूसरे काम में किया गया, तो 12 फीसदी ब्याज सहित वसूली की जाएगी.
  4. निरीक्षण: संबंधित प्राधिकारी को सहायता प्राप्त वकील की लाइब्रेरी का निरीक्षण करने का अधिकार होगा.

कोर्ट की टिप्पणी: “पहली पीढ़ी के वकीलों के पास संसाधन नहीं होते”

अदालत ने अपने आदेश में भावुक टिप्पणी करते हुए कहा कि वकील बनना एक गर्व का क्षण है, लेकिन पहली पीढ़ी के उभरते वकीलों को अपनी प्रैक्टिस स्थापित करने के लिए जरूरी संसाधन और किताबें खरीदने का फंड नहीं होता है. वे केस तैयार करते हैं, सीनियर वकीलों की सहायता करते हैं और अदालतों में लंबी प्रतीक्षा करते हैं, लेकिन अक्सर उनके प्रयासों को अनदेखा किया जाता है. यदि उन्हें शुरुआत में उचित समर्थन मिले तो वे ईमानदार व कुशल पेशेवर बन सकते हैं.

फंड कहां से आएगा?

अदालत ने देरी से अपील पेश करने वाले अपीलार्थियों पर 11 हजार रुपये का हर्जाना लगाया है और इसे ‘जूनियर एडवोकेट्स वेलफेयर फंड’ के नाम से बैंक खाते में जमा कराने को कहा है. इसी फंड से मदद दी जाएगी। मामले की अगली सुनवाई 6 मार्च को होगी, तब तक पालना रिपोर्ट पेश करनी होगी.

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