जयपुर: भारतीय रेलवे (Indian Railways) ने राजस्थान के रेल यात्रियों और श्रद्धालुओं को एक बड़ी सौगात दी है। रेलवे ने प्रदेश में कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए 470.34 करोड़ रुपये की लागत से 50.06 किलोमीटर लंबे रींगस-सीकर रेलखंड (Ringas-Sikar Section) के दोहरीकरण (Doubling) को मंजूरी दे दी है। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से शेखावाटी क्षेत्र में रेल यातायात की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी।
धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बड़ा बूस्ट इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ धार्मिक पर्यटन को होगा।
- खाटू श्यामजी और सालासर बालाजी: उत्तर पश्चिम रेलवे के अनुसार, इस रेलखंड के दोहरीकरण से लाखों श्रद्धालुओं के लिए खाटू श्यामजी (सीकर) और सालासर बालाजी (चूरू) जैसे प्रमुख तीर्थ स्थलों तक पहुंचना बेहद सुगम हो जाएगा।
- समय की बचत: डबल ट्रैक होने से ट्रेनों की लेटलतीफी खत्म होगी और यात्रा के समय में कमी आएगी।
चलेंगी 5 अतिरिक्त ट्रेनें, माल ढुलाई भी बढ़ेगी रेलवे अधिकारियों ने बताया कि दोहरीकरण के बाद इस रूट की क्षमता में जबरदस्त सुधार होगा।
- नई ट्रेनें: प्रतिदिन दोनों दिशाओं में 5 अतिरिक्त ट्रेनों का परिचालन संभव हो सकेगा।
- माल ढुलाई: माल ढुलाई में 2.36 मीट्रिक टन प्रति वर्ष की वृद्धि होगी, जिससे रेलवे और स्थानीय व्यापारियों दोनों को फायदा होगा।
- औद्योगिक विकास: सीमेंट और अन्य खनिजों की ढुलाई आसान होने से स्थानीय उद्योगों और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।
क्यों जरूरी था दोहरीकरण?
आंकड़ों के मुताबिक, अभी इस सिंगल लाइन रेलखंड की 77 प्रतिशत क्षमता का उपयोग हो रहा है। अनुमान है कि वर्ष 2029-30 तक यह बढ़कर 210 प्रतिशत हो जाएगी। भविष्य में बढ़ने वाले इस ट्रैफिक को संभालने के लिए अभी से दोहरीकरण करना अनिवार्य हो गया था। यह परियोजना भारतीय रेलवे की भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई गई है।
