जयपुर, गुलाबी नगरी में आयोजित विश्व प्रसिद्ध ‘जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2026’ (JLF) का मंच उस समय भक्ति रस में सराबोर हो गया, जब अनिल अग्रवाल फाउंडेशन के स्टेज पर कबीर, मीरा, दादू और डूंगरपुरी जैसे महान संतों की अमर वाणियां गूंजी। रूमा देवी फाउंडेशन के ‘वाणी उत्सव 2026’ की अग्रिम प्रस्तुति के रूप में कलाकारों ने अपनी सुमधुर आवाज से साहित्य प्रेमियों को सम्मोहित कर दिया।
कविता पोटलिया की राजस्थानी सुरमयी आवाज का जादू
थार की प्रसिद्ध भजन गायिका कविता पोटलिया ने कार्यक्रम की शुरुआत वीणा की थाप पर कबीर की प्रसिद्ध रचना “ऐसा ऐसा राम रस पिओ मेरे भाई” से की। उनकी राजस्थानी लोक शैली में डूबी इस प्रस्तुति ने श्रोताओं को राम नाम की धुन में बांध दिया। इसके बाद उन्होंने मानव जीवन की चार अवस्थाओं के यथार्थ को दर्शाने वाला भजन “जोबनीयो जातो रहयो अब आई बुढ़ापे री वार” प्रस्तुत किया, जिसे युवाओं और बुजुर्गों—दोनों ही वर्गों ने खूब सराहा।
वीणा की झंकार और भक्ति की बयार
वाणी उत्सव के वीणा गायक गणेश कुमार बोसिया ने अपने भजनों से पांडाल में मौजूद लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया। उनके गाए भजन “वारी जाऊ” पर श्रोता मंत्रमुग्ध नजर आए। इस दिव्य संगीत कार्यक्रम का निर्देशन जाने-माने संगीतकार नरसिंह बाकोलिया ने किया।
संतों की वाणी जीवन में उतारने की जरूरत: रूमा देवी
इस अवसर पर रूमा देवी फाउंडेशन की निदेशक और प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता रूमा देवी ने कहा कि भक्ति काल के संतों ने समाज को समभाव के सूत्र में पिरोने का कार्य किया था। उन्होंने कहा, “आज के दौर में इन संतों की वाणी को केवल सुनने की नहीं, बल्कि जीवन में उतारने की आवश्यकता है।” उन्होंने वीणा गायकों और लोक कलाकारों को आगे आने का आह्वान किया।
गणमान्य जनों की गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम के दौरान अनिल अग्रवाल फाउंडेशन (वेदांता समूह) के अयोध्या प्रसाद गौड़, खुर्रम नायब, लक्षित चौधरी, पूर्व मुख्य सचिव व साहित्यकार निरंजन आर्य सहित देश-दुनिया से आए साहित्य प्रेमी और संगीत अनुरागी उपस्थित रहे। भजन गायिका कविता पोटलिया ने लोक कला को यह अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान करने के लिए अनिल अग्रवाल फाउंडेशन का आभार जताया।
