जयपुर, जयपुर के जेईसीसी में आयोजित राजस्थान डिजिफेस्ट-टाई ग्लोबल समिट 2026 के अंतिम दिन ‘ड्राइविंग इम्पैक्ट थ्रू इंस्टीट्यूशनल लीडरशिप’ विषय पर एक महत्वपूर्ण पैनल चर्चा आयोजित की गई। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दौर में प्रभावी नेतृत्व ही तकनीकी बदलावों को सामाजिक कल्याण की दिशा में मोड़ सकता है।
तकनीक और मानवीय संवेदनाओं का संतुलन: डॉ. शीनू झवर
टाई (TiE) राजस्थान की अध्यक्ष डॉ. शीनू झवर ने सत्र की अध्यक्षता करते हुए कहा कि एआई ने संस्थानों के काम करने के तरीके को बदल दिया है। उन्होंने कहा, “आज के लीडर्स के सामने सबसे बड़ी चुनौती तकनीक को मानवीय संवेदनाओं, नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ संतुलित करना है।”
स्वास्थ्य सेवाओं में डेटा और एआई का कमाल
‘पाथ’ (PATH) के कंट्री डायरेक्टर नीरज जैन ने स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि डेटा-आधारित नवाचारों से दूरदराज के ग्रामीण इलाकों और वंचित वर्गों तक सटीक स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाना अब संभव हो गया है। मजबूत संस्थागत नेतृत्व इन सेवाओं को अधिक त्वरित और प्रभावी बना रहा है।
शिक्षा का भविष्य: पाठ्यक्रम से आगे कौशल विकास
विवेकानंद ग्लोबल यूनिवर्सिटी (VGU) के सीईओ ओमकार बगड़िया ने शिक्षा क्षेत्र पर विचार रखते हुए कहा कि भविष्य की शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं रहेगी। अब संस्थानों का ध्यान कौशल विकास (Skill Development) और समस्या समाधान पर केंद्रित होना चाहिए ताकि विद्यार्थियों को उद्योग की वास्तविक जरूरतों के लिए तैयार किया जा सके।
चिकित्सा में सटीकता और नैतिकता
राजकीय मेडिकल कॉलेज, चित्तौड़गढ़ के डॉ. अतुल तिवारी ने एआई-आधारित डायग्नोस्टिक्स और डिजिटल मेडिकल रिकॉर्ड्स के लाभ साझा किए। उन्होंने कहा कि टेलीमेडिसिन ने स्वास्थ्य सेवाओं की गति और गुणवत्ता में सुधार किया है, लेकिन तकनीक के साथ-साथ चिकित्सकीय विवेक और नैतिकता बनाए रखना अनिवार्य है।
प्रमुख बिंदु (Highlights):
- संस्थागत नेतृत्व: तकनीक को समाज के हित में दिशा देने के लिए विजनरी लीडरशिप जरूरी।
- हेल्थकेयर: एआई और टेलीमेडिसिन से ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा की पहुँच बढ़ी।
- एजुकेशन: एआई के दौर में रट्टा मारने के बजाय ‘इनोवेशन’ पर आधारित होगी पढ़ाई।
- नैतिकता: तकनीकी विकास के साथ मानवीय मूल्यों और डेटा गोपनीयता का संरक्षण आवश्यक।
