करौली जिले के टोडाभीम नगर पालिका में वार्डों के पुनर्गठन और परिसीमन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब बड़े आंदोलन का रूप ले चुका है। परिसीमन प्रक्रिया में भारी अनियमितता और राजनीतिक भेदभाव का आरोप लगाते हुए स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने कस्बे के मुख्य चौराहे पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। आंदोलन के समर्थन में मंगलवार को दूसरे दिन भी बाजार पूरी तरह बंद रहे।
वार्डों के गठन में ‘भारी असमानता’ का आरोप
प्रदर्शनकारियों का मुख्य आरोप है कि प्रशासन ने वार्डों की सीमाएं तय करते समय लोकतांत्रिक मूल्यों को ताक पर रख दिया है। आंकड़ों का हवाला देते हुए प्रदर्शनकारियों ने बताया कि:
- सामान्य वर्ग के वार्डों में मात्र 200 से 250 मतदाताओं पर एक वार्ड बना दिया गया है।
- इसके विपरीत, अनुसूचित जाति (SC), जनजाति (ST) और अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में 800 से 900 मतदाताओं पर एक पार्षद चुने जाने की व्यवस्था की गई है।
आरोप है कि यह विसंगति कुछ खास लोगों को अनुचित राजनीतिक लाभ पहुँचाने और विशेष वर्गों के प्रतिनिधित्व को कमजोर करने के उद्देश्य से की गई है।
पूर्व मंत्री ने उठाए सवाल, जांच की मांग
पूर्व मंत्री रामस्वरूप मीना ने भी इस मामले में सरकार और प्रशासन को घेरा है। उन्होंने कहा कि सीमांकन प्रक्रिया न तो निष्पक्ष थी और न ही पारदर्शी। उन्होंने आरोप लगाया कि आम जनता से कोई आपत्ति या सुझाव मांगे बिना ही गुपचुप तरीके से वार्डों की सीमाएं बदल दी गईं। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच और सुधार की मांग की है।
बाजार बंद से ग्रामीण परेशान

कस्बे में मेडिकल सेवाओं को छोड़कर सभी व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहने से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। दूर-दराज के गांवों से खरीदारी करने आए ग्रामीणों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दूसरे दिन भी बाजार बंद होने के कारण रोजमर्रा के सामान और जरूरी वस्तुओं के लिए लोग भटकते नजर आए और अंततः उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा।
प्रशासन का पक्ष: ‘नियमों के तहत हुआ काम’
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम (SDM) अमन चौधरी ने कहा कि परिसीमन में अनियमितता के आरोपों की जांच कराई जाएगी। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को भरोसा दिलाया कि वाजिब मांगों पर नियमानुसार विचार कर समाधान निकाला जाएगा।
वहीं, नगर पालिका ईओ हनुमान शर्मा ने सफाई देते हुए कहा कि, “वार्डों का परिसीमन जिला कलेक्टर द्वारा निर्धारित कमेटी ने किया है। यह 2011 की जनगणना के आधार पर है। जनसंख्या में पलायन और स्वाभाविक वृद्धि के कारण मतदाताओं की संख्या में अंतर आया है, जिसे गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।”
फिलहाल, आंदोलनकारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और उनका कहना है कि जब तक परिसीमन में सुधार नहीं होता, बाजार बंद और धरना जारी रहेगा।
