सूरतगढ़/श्रीगंगानगर: सरकारी दफ्तरों में भ्रष्टाचार का एक और बड़ा मामला सामने आया है, जहाँ एक बाबू ने होमगार्ड जवान की सैलरी पास करने के बदले ‘मंथली’ (मासिक रिश्वत) बांधने की कोशिश की। लेकिन कहानी में सस्पेंस तब आया जब एसीबी (ACB) के ट्रैप वाले दिन अचानक बाबू को शक हो गया और पूरा प्लान पलट गया। हालांकि, पुख्ता सबूतों के आधार पर एसीबी ने अब इस मामले में एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है।
सैलरी पास करने के लिए 3 हजार की ‘मंथली’ डिमांड
परिवादी दीपक गौड़ राजस्थान गृह रक्षा विभाग में होमगार्ड है और मार्च 2025 से एसडीएम कार्यालय सूरतगढ़ में अपनी ड्यूटी कर रहा है। एसडीएम कार्यालय का बाबू, रणवीर गोदारा, होमगार्ड जवानों के सैलरी बिल पास करवाकर ट्रेजरी भेजने का काम करता था जिससे उनका लगभग 24,000 रुपये वेतन आता था। आरोप है कि रणवीर गोदारा ने सितंबर 2025 का सैलरी बिल पास करने के बदले दीपक से 3,000 रुपये की रिश्वत मांगी और धमकी दी कि “हर महीने 3,000 रुपये दे दिया कर, वरना सैलरी रोक लूंगा और ड्यूटी से भी हटवा दूंगा”।
गोपनीय सत्यापन में लिए 2 हजार रुपये
दीपक गौड़ ने इस ब्लैकमेलिंग की शिकायत 29 अक्टूबर 2025 को एसीबी से की। 30 अक्टूबर 2025 को जब एसीबी ने शिकायत का गोपनीय सत्यापन (verification) करवाया, तब आरोपी बाबू रणवीर गोदारा ने बिल पास करने के बदले 3,000 रुपये हर महीने देने की बात दोहराई। उसने मौके पर 2,000 रुपये ले भी लिए और बाकी के 1,000 रुपये अगले महीने की राशि के साथ मांगे।
ट्रैप के दिन आया ट्विस्ट: बाबू को हुआ शक!
सत्यापन के बाद एसीबी ने 12 और 13 नवंबर 2025 को ट्रैप की योजना बनाई। परिवादी दीपक 4,000 रुपये की ट्रैप राशि लेकर एसडीएम कार्यालय पहुँचा। लेकिन यहाँ कहानी में ट्विस्ट आ गया। आरोपी बाबू रणवीर गोदारा को एसीबी की भनक लग गई थी। उसने दीपक से पैसे लेने से इंकार कर दिया और बात घुमा दी। अगले दिन जब दीपक वापस गया, तो बाबू ने कहा कि उसके पास टाइम नहीं है, और उसे वहाँ से भगा दिया। बाबू को शक हो गया था, इसलिए उसने दीपक से बात करना ही बंद कर दिया।
ट्रैप फेल, पर ऑडियो रिकॉर्डिंग ने खोल दी पोल
जब परिवादी को लगा कि अब बाबू रिश्वत नहीं लेगा, तो उसने 5 दिसंबर 2025 को एसीबी को लिखित में दे दिया कि ट्रैप की कार्यवाही बंद कर दी जाए और उसके 4,000 रुपये वापस किए जाएं। भले ही आरोपी रंगे हाथों नहीं पकड़ा गया और ट्रैप फेल हो गया, लेकिन एसीबी के डिजिटल वॉयस रिकॉर्डर में 3,000 रुपये की मांग और 2,000 रुपये लेने की बात पहले ही रिकॉर्ड हो चुकी थी। इसी पुख्ता वैज्ञानिक सबूत के आधार पर एसीबी ने अब आरोपी रणवीर गोदारा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है और कानूनी कार्यवाही शुरू कर दी है।
