सिरसा | हरियाणा के सिरसा निवासी 16 वर्षीय युवा एथलीट निहाल सिंह ने उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में भारत का परचम फहराया है। ‘वर्ल्ड आर्म रेसलिंग और पैरा आर्म रेसलिंग कप 2026’ में अपने अद्भुत खेल कौशल का प्रदर्शन करते हुए उन्होंने देश के लिए कांस्य पदक पर कब्जा जमाया है।
60 किलो भार वर्ग के लेफ्ट हैंड मुकाबले में दिखाया दम

ग्रेटर नोएडा की बेनेट यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई कर रहे निहाल (इंस्टाग्राम हैंडल @nihal_1902) ने इस वैश्विक मंच पर एक बेहद कठिन कैटेगरी में चुनौती पेश की। उन्होंने ‘सीनियर मेंस 60 किलोग्राम’ भार वर्ग के ‘लेफ्ट हैंड’ (बाएं हाथ) मुकाबलों में हिस्सा लिया। इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में 26 विभिन्न देशों के अनुभवी और पेशेवर एथलीट्स ने अपनी चुनौती पेश की थी। इन कड़े मुकाबलों के बीच अपनी शानदार पकड़ और टेबल तकनीक के बलबूते निहाल ने तीसरा स्थान हासिल कर भारत की झोली में कांस्य पदक डाल दिया।
यूट्यूब से सीखी बारीकियां, घर पर बना अखाड़ा
इस बड़ी अंतरराष्ट्रीय जीत की सबसे खास बात यह है कि निहाल ने किसी पेशेवर कोच या अकादमी से ट्रेनिंग नहीं ली है। उन्होंने यूट्यूब पर अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों के वीडियो देखकर आर्म रेसलिंग (पंजा लड़ाने) की ‘कलिस्टेनिक्स’ और ‘रिस्ट कंट्रोल’ जैसी तकनीकी बारीकियां सीखीं। बेटे के इस अटूट जुनून को देखते हुए पिता कुलविंदर सिंह ने मई 2025 में घर पर ही लकड़ी का एक विशेष आर्म रेसलिंग टेबल तैयार कर दिया था। इसी टेबल पर निहाल ने अपनी ग्रिप और ताकत का घंटों अभ्यास किया।
परिवार और शहर में जश्न का माहौल

इस ऐतिहासिक जीत से उनके परिवार और पूरे सिरसा शहर में खुशी की लहर दौड़ गई है। उनकी मां रजनी, बहन डॉ. भव्या और भाई अनमोल चड्ढा इस सफलता पर बेहद गर्व महसूस कर रहे हैं। निहाल के सिरसा लौटने पर शहर की सामाजिक संस्थाओं ने उनका भव्य स्वागत किया। जय देव-सहदेव जैन चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष ललित जैन ने इसे पूरे देश के लिए गौरव का क्षण बताया। इसके साथ ही, लायंस क्लब सिरसा अमर के संस्थापक अध्यक्ष स्वामी रमेश साहुवाला ने निहाल को विशेष प्रशस्ति पत्र और स्वर्ण पदक देकर सम्मानित किया।
अगला लक्ष्य: देश के लिए गोल्ड
बिना किसी बड़ी सुविधा के विश्व स्तर पर पदक जीतकर निहाल ने युवाओं के सामने एक बड़ी मिसाल पेश की है। इस शानदार सफलता के बाद अब उनका हौसला आसमान छू रहा है। इस युवा स्टार का अगला लक्ष्य भविष्य की प्रतियोगिताओं में अपनी तकनीक को और अधिक निखारना और भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतना है।
