राजस्थान में खनन माफियाओं के हौसले किस कदर बुलंद हैं, इसका एक खौफनाक खुलासा सीकर जिले में हुआ। ‘Expose Now’ की पड़ताल में सामने आया है कि खनन विभाग की नाक के नीचे 13 खदानों से करोड़ों का पत्थर अवैध रूप से खोदकर बेच दिया गया, जबकि सरकारी फाइलों में इसकी आधी जानकारी भी दर्ज नहीं।
ड्रोन मैपिंग ने उड़ाई विभाग की नींद
आमतौर पर अंधेरे में रहने वाले इन काले कारनामों को इस बार ‘ड्रोन टेक्नोलॉजी’ ने बेनकाब किया। माइनिंग एक्सपर्ट्स के साथ की गई जांच में सामने आया है कि:
- रिकॉर्ड में खनन: केवल 61.74 लाख टन।
- हकीकत (ड्रोन सर्वे): करीब 1.28 करोड़ टन पत्थर निकाला जा चुका है।
- अवैध खनन का अंतर: 66.36 लाख टन पत्थर का कोई हिसाब नहीं है।
- राजस्व का नुकसान: सीधे तौर पर सरकार को 132 करोड़ रुपये के राजस्व का चूना लगा है।
पहाड़ों की जगह अब गहरे गड्ढे
सीकर के मीणा की नांगल इलाके (राजस्थान-हरियाणा बॉर्डर) में खनन का यह खेल ऐसा चला कि जहां कभी 20 मीटर ऊंचे पहाड़ हुआ करते थे, वहां आज 95 मीटर तक गहरे खौफनाक गड्ढे बन चुके। 13 हेक्टेयर में फैले इस इलाके में माफियाओं ने नियमों को ताक पर रखकर धरती का सीना छलनी कर दिया।
कौन है इन 132 करोड़ की लूट का जिम्मेदार?
सवाल यह उठता है कि जब 2014 से लगातार यह अवैध खेल चल रहा था, तो जिम्मेदार अधिकारी क्या कर रहे थे?
- तत्कालीन माइनिंग इंजीनियर जे.पी. जाखड़।
- सहायक खनिज अभियंता अनिल गुप्ता।
- और बाद में जिम्मेदारी संभालने वाले मनोज शर्मा, धर्म सिंह मीणा व अमीचंद दुहारिया।
इन अधिकारियों के कार्यकाल के दौरान यह अवैध खनन फला-फूला, जिससे सरकारी खजाने को भारी चपत लगी।
सॉफ्टवेयर से खुला ‘अवैध’ राज
इस खुलासे के लिए करीब 600 फोटो लेकर उन्हें खास सॉफ्टवेयर और DGPS डिवाइस के जरिए डिजिटल टेरेन मॉडल में बदला गया। इससे साफ हो गया कि खनन पट्टा संख्या 102/2002, 71/2002 और 63/2002 जैसी खदानों में स्वीकृत सीमा से कहीं ज्यादा खुदाई की गई।
बड़ा सवाल: वसूली होगी या साठगांठ से रफा-दफा होगा मामला?
सीकर के इस 132 करोड़ रुपये के महाघोटाले में अब सबकी नजरें खनिज विभाग के अगले कदम पर टिकी हैं। क्या विभाग महज खानापूर्ति करेगा या वास्तव में दोषियों पर शिकंजा कसेगा?
- पेनल्टी और वसूली: नियम कहते हैं कि अवैध खनन की स्थिति में लीज धारकों से बाजार दर के हिसाब से भारी पेनल्टी वसूली जानी चाहिए। क्या विभाग इन 13 पट्टाधारकों से पेनल्टी सहित करोड़ों की वसूली की हिम्मत जुटा पाएगा?
- FIR का डर किसे?: इतने बड़े पैमाने पर सरकारी संपत्ति की चोरी ‘क्रिमिनल ऑफेंस’ की श्रेणी में आती है। क्या विभाग खनन माफियाओं के खिलाफ नामजद एफआईआर (FIR) दर्ज कराएगा या फिर पुराने रिकॉर्ड्स की तरह इस मामले को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?
- मिलीभगत का खेल: सालों से हो रहे इस अवैध खनन पर अधिकारियों की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। क्या उन जिम्मेदारों (AME, ME और अन्य अधिकारियों) पर भी कार्रवाई होगी जिनकी नाक के नीचे पहाड़ों का अस्तित्व मिटा दिया गया?
अब क्या होगा?
प्रशासनिक गलियारों में इस खुलासे के बाद हड़कंप मचा है। एएमई अशोक वर्मा का कहना है कि खान मालिकों से ड्रोन सर्वे रिपोर्ट मांगी गई है और गड़बड़ी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
‘Expose Now’ पूछता है— क्या यह जांच केवल कागजों तक सीमित रहेगी या राजस्थान की जनता के 132 करोड़ रुपये वापस सरकारी खजाने में आएंगे?
