चित्तौड़गढ़: चित्तौड़गढ़ (मेवाड़) के प्रसिद्ध श्रीसांवलियाजी मंदिर में मंगलवार को भंडार की गिनती का छठा राउंड पूरा हुआ। मंदिर प्रशासन के अनुसार, अब तक हुई 6 राउंड की गिनती में कुल 36 करोड़ 49 लाख 82 हजार रुपए की नकद राशि प्राप्त हो चुकी है। बुधवार को सातवां और संभवतः अंतिम राउंड शुरू होगा, जिसमें चिल्लर (सिक्कों), ऑनलाइन प्राप्त दान और भक्तों द्वारा चढ़ाए गए सोने-चांदी के गहनों का वजन किया जाएगा।
काउंटिंग रिपोर्ट: किस राउंड में कितनी मिली नकदी? (Table)
| राउंड (तारीख) | प्राप्त नकद राशि | मुख्य आकर्षण / टिप्पणी |
| राउंड 1 (2 मार्च) | ₹10.65 करोड़ | डेढ़ महीने बाद खुला भंडार |
| राउंड 2 (5 मार्च) | ₹7.25 करोड़ | उत्सवों के बाद शुरू हुई गिनती |
| राउंड 3 (6 मार्च) | ₹2.61 करोड़ | भक्तों की भारी श्रद्धा |
| राउंड 4 (7 मार्च) | ₹8.55 करोड़ | शनिवार की विशेष गिनती |
| राउंड 5 (9 मार्च) | ₹5.47 करोड़ | रविवार के अवकाश के बाद गणना |
| राउंड 6 (10 मार्च) | ₹1.95 करोड़ | मंगलवार को छठा राउंड पूरा |
| कुल योग (6 राउंड) | ₹36.49 करोड़ | नकद राशि मात्र |
रिकॉर्ड की ओर बढ़ता कदम ।
मंदिर प्रशासन ने बताया कि अब तक का सर्वाधिक चढ़ावा नवंबर 2025 में दर्ज किया गया था, जब भंडार से कुल 51 करोड़ 27 लाख रुपए से अधिक की राशि निकली थी। इस बार की कुल राशि का सटीक अनुमान आज सोने-चांदी और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के आंकड़े जुड़ने के बाद ही लग पाएगा।
आस्था का प्रतीक: मूर्ति के सीने पर ‘भृगु ऋषि’ के पदचिह्न
श्रीसांवलियाजी की प्रतिमा न केवल भव्य है, बल्कि इसके पीछे एक गहरी पौराणिक मान्यता भी जुड़ी है। मूर्ति के सीने पर एक पदचिह्न (पैर का निशान) है, जिसे भृगु ऋषि का माना जाता है।
पौराणिक कथा: एक बार भृगु ऋषि ने त्रिदेवों की परीक्षा ली। जब वे भगवान विष्णु के पास पहुँचे, तो उन्होंने विष्णु जी के सीने पर प्रहार किया। भगवान ने क्रोध करने के बजाय ऋषि का पैर पकड़ लिया और उनकी कुशलता पूछी। भगवान की इसी विनम्रता और सहनशीलता को देखकर उन्हें त्रिदेवों में श्रेष्ठ माना गया। सांवलिया सेठ की मूर्ति पर मौजूद यह निशान उसी महान प्रसंग की याद दिलाता है।
