राज्य के शिक्षा विभाग में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन स्कूलों में शिक्षकों और प्रशासनिक स्टाफ की भारी कमी के कारण पढ़ाई व्यवस्था प्रभावित होती नजर आ रही है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार माध्यमिक शिक्षा में कुल 1.24 लाख पद खाली हैं, जिनमें प्रिंसिपल, वरिष्ठ अध्यापक और अन्य महत्वपूर्ण पद शामिल हैं।
प्रिंसिपल और वरिष्ठ अध्यापकों की सबसे ज्यादा कमी
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार:
- प्रिंसिपल के 5945 पद रिक्त हैं
- वरिष्ठ अध्यापक (सीनियर टीचर) के 43,169 पद खाली हैं
इन पदों पर लंबे समय से भर्ती नहीं होने के कारण स्कूलों का संचालन प्रभावित हो रहा है। कई स्कूलों में प्रिंसिपल का अतिरिक्त प्रभार अन्य शिक्षकों को दिया गया है, जिससे प्रशासनिक और शैक्षणिक कार्यों पर असर पड़ रहा है।
अन्य कैडर में भी बड़े पैमाने पर रिक्तियां
शिक्षा विभाग के विभिन्न कैडर में भी हजारों पद खाली पड़े हैं। इनमें व्याख्याता, तृतीय श्रेणी शिक्षक, शारीरिक शिक्षक, और प्रयोगशाला सहायक जैसे पद शामिल हैं। कई जिलों में स्थिति और भी गंभीर है, जहां शिक्षकों की कमी के चलते कक्षाएं नियमित रूप से संचालित नहीं हो पा रही हैं।
पढ़ाई और नामांकन पर असर
रिक्त पदों का सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा है:
- नए सत्र में पढ़ाई समय पर शुरू नहीं हो पा रही
- नामांकन प्रक्रिया भी धीमी पड़ रही है
- कई स्कूलों में विषय विशेषज्ञ शिक्षक नहीं होने से विद्यार्थियों को पूरी शिक्षा नहीं मिल पा रही
कंप्यूटर शिक्षा भी प्रभावित
कंप्यूटर अनुदेशकों की कमी भी एक बड़ी समस्या बनकर सामने आई है:
- वरिष्ठ कंप्यूटर अनुदेशक के 1182 पदों में से 945 खाली
- बेसिक कंप्यूटर अनुदेशक के 9856 पदों में से 3702 रिक्त
डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के प्रयास इन रिक्तियों के कारण कमजोर पड़ रहे हैं।
प्रशासनिक पदों पर भी असर
माध्यमिक शिक्षा के बड़े अधिकारियों के स्तर पर भी कई पद खाली हैं। इससे नीतिगत फैसलों और स्कूलों की निगरानी पर असर पड़ रहा है। विभागीय कार्यों की गति धीमी होने से शिक्षा सुधार की योजनाएं भी प्रभावित हो रही हैं।
भर्ती प्रक्रिया में देरी बना कारण
विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर भर्ती नहीं होना इस संकट का मुख्य कारण है। कई भर्तियां लंबित हैं या प्रक्रिया में देरी हो रही है, जिससे रिक्त पदों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
समाधान की जरूरत
शिक्षा विशेषज्ञों और अभिभावकों का कहना है कि:
- जल्द से जल्द भर्ती प्रक्रिया तेज की जाए
- अस्थायी व्यवस्था के बजाय स्थायी नियुक्तियां हों
- ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में विशेष ध्यान दिया जाए
यदि समय रहते इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले समय में छात्रों की शिक्षा की गुणवत्ता पर गंभीर असर पड़ सकता है।
