-11 में से केवल 4 फुल-टाइम ‘चीफ’, बाकी सब ‘अतिरिक्त चार्ज-चहेतों’ के भरोसे
-2 सीई जेल में, 1 सस्पेंड और 1 एपीओ, बाकी 3 पद लंबे समय से डीपीसी के अभाव में खाली
राजस्थान के जलदाय विभाग (PHED) में इन दिनों सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। एक तरफ राज्य की जनता पानी की बूंद-बूंद के लिए तरस रही है, वहीं दूसरी तरफ विभाग के मुखिया यानी पीएचईडी मंत्री कन्हैयालाल चौधरी पर विभाग के प्रशासनिक ढांचे को पंगु बनाने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। चर्चा है कि मंत्री जी की ‘हठधर्मिता’ और अपने चहेतों को ‘मलाईदार’ पदों पर बनाए रखने की जिद के कारण पिछले डेढ़ साल से चीफ इंजीनियर (CE) पदों की DPC (विभागीय पदोन्नति समिति) रुकी हुई है। डेढ़ साल से चीफ इंजीनियर (CE) पदों की DPC (विभागीय पदोन्नति समिति) को रोककर मंत्री ने यह साफ कर दिया है कि उनके लिए नियम नहीं, बल्कि ‘अपने’ ज्यादा कीमती हैं।
DPC रोकने के पीछे का ‘खेला’: चहेते और स्वजाति समीकरण
सूत्रों की मानें तो DPC न होने के पीछे दो मुख्य कारण बताए जा रहे हैं:
अतिरिक्त चार्ज का मोह:
अगर आज DPC होती है, तो कई जूनियर अधिकारी जो वर्तमान में ‘अतिरिक्त चार्ज’ के जरिए चीफ इंजीनियर की कुर्सी का लुत्फ उठा रहे हैं, उन्हें वह पद छोड़ना पड़ेगा।
जातिगत समीकरण:
विभाग में सुगबुगाहट है कि वर्तमान में एक भी ‘स्वजातीय’ इंजीनियर चीफ इंजीनियर बनने की कतार में फिट नहीं बैठ रहा है। चर्चा है कि डीपीसी करने से चहेतों के पास से अतिरिक्त चार्ज छीन जाएगा, जिससे पर्दें के पीछे के ‘गठजोड़’ के सारे ‘खेल’ बंद हो जाएंगे। इसके लिए सबसे अच्छा रास्ता है कि चहेतों को अतिरिक्त चार्ज देकर काम करो और तब तक DPC को ठंडे बस्ते में रखने की तैयारी है।
11 में से केवल 4 फुल-टाइम ‘चीफ’, बाकी सब ‘चहेतों’ के भरोसे
विभाग में चीफ इंजीनियर के कुल 11 पद स्वीकृत हैं, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि केवल 4 पदों पर ही फुल-टाइम अधिकारी तैनात हैं। शेष 7 पदों का काम चहेतों को ‘अतिरिक्त चार्ज’ या ‘कामचलाऊ’ व्यवस्था के भरोसे है।
वर्तमान फुल-टाइम चीफ इंजीनियर्स:
संदीप शर्मा: CE (एण्ड एएस)
आर.के. मीणा: CE (क्वालिटी कंट्रोल) – 30 अप्रैल को रिटायर हो रहे हैं, जिससे संकट और बढ़ेगा।
नीरज माथुर: CE (टीएम) – इनके पास जायका का अतिरिक्त चार्ज भी है।
देवराज सोलंकी: CE (प्रोजेक्ट जोधपुर) – इनके पास शहरी एवं NRW का अतिरिक्त चार्ज है।
मलाईदार पदों पर ‘करीबियों’ का कब्जा: अतिरिक्त चार्ज का मायाजाल
पदों को खाली रखकर चहेते अधिकारियों को एक साथ दो-दो, तीन-तीन कुर्सियां सौंप दी गई हैं। इनमें सबसे चर्चित नाम हैं:
राजसिंह चौधरी (ACE स्पेशल प्रोजेक्ट): इन्हें पिछले 2 साल से विभाग की सबसे ‘मलाईदार’ सीट मानी जाने वाली CE (स्पेशल प्रोजेक्ट) का अतिरिक्त प्रभार दे रखा है। मंत्री जी के सबसे करीबियों में शुमार चौधरी के पास अक्सर कई पदों का चार्ज रहता है।
सुरेन्द्र शर्मा (ACE प्रोजेक्ट भरतपुर): फरवरी में भ्रष्टाचार मामले में जेल गए के.डी. गुप्ता के सस्पेंड होने के बाद इन्हें CE (ग्रामीण) का अतिरिक्त प्रभार थमा दिया गया।
मुकेश बंसल (ACE राजपत्रित): भ्रष्टाचार में फंसे दिनेश गोयल के जेल जाने के बाद इन्हें CE (प्रशासन) का अतिरिक्त चार्ज मिला हुआ है।
शैतान सिंह (ACE उदयपुर): दिनेश गोयल के हटने के बाद इन्हें CE (प्रोजेक्ट उदयपुर) की जिम्मेदारी दी गई है।
भ्रष्टाचार की भेंट चढ़े पद: जेल, सस्पेंशन और टकराव की कहानी
जलदाय विभाग के इतिहास में संभवतः यह पहली बार है जब इतनी बड़ी संख्या में उच्च पद खाली या विवादित हैं:-
दिनेश गोयल: भ्रष्टाचार के आरोप में ACB द्वारा फरवरी 2026 में गिरफ्तारी। फिलहाल जेल में और सस्पेंड।
के.डी. गुप्ता: भ्रष्टाचार मामले में ACB की कार्रवाई, वर्तमान में जेल और सस्पेंशन।
महेश जांगिड़: लंबे समय से ACB प्रकरण के चलते सस्पेंशन झेल रहे हैं।
मनीष बेनीवाल: मंत्री कन्हैयालाल चौधरी से पिछले कई महीनों से चल रहे टकराव का खामियाजा भुगता और 1 मार्च 2026 को इन्हें APO (पदस्थापन की प्रतीक्षा में) कर दिया गया।
निष्कर्ष: दांव पर विभाग की साख
जब विभाग के आधे से ज्यादा शीर्ष पद ‘अतिरिक्त प्रभार’ और ‘सस्पेंशन’ के साये में हों, तो नीतिगत फैसले लेना असंभव हो जाता है। 30 अप्रैल को आर.के. मीणा के रिटायरमेंट के बाद फुल-टाइम चीफ इंजीनियर्स की संख्या घटकर केवल 3 रह जाएगी। सवाल यह उठता है कि क्या पीएचईडी मंत्री केवल अपने ‘करीबियों’ को उपकृत करने के लिए पूरे महकमे की कार्यप्रणाली को दांव पर लगा रहे हैं?
क्या मुख्यमंत्री इस ‘हठधर्मिता’ पर संज्ञान लेंगे या जलदाय विभाग इसी तरह ‘अतिरिक्त प्रभार’ के सहारे डूबता रहेगा?
