राजस्थान में सब इंस्पेक्टर (SI) भर्ती-2021 को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने बेहद तल्ख और गंभीर टिप्पणियां की हैं। 5 और 6 अप्रैल को आयोजित हुई नई एसआई भर्ती परीक्षा के ठीक पहले आए इस फैसले ने 2021 की पूरी चयन प्रक्रिया को संदेह के घेरे में खड़ा कर दिया है। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने साफ तौर पर कहा कि वर्ष 2021 में परीक्षा का प्रबंधन इतना कमजोर था कि इसने भर्ती की निष्पक्षता और सुरक्षा को पूरी तरह खत्म कर दिया।
प्रबंधन की ‘बड़ी लापरवाही’ उजागर
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायमूर्ति संगीता शर्मा की खंडपीठ ने आरपीएससी (RPSC) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रवेश पत्रों पर फोटो तक स्पष्ट नहीं थीं। कोर्ट ने पूछा कि ऐसी स्थिति में ‘डमी अभ्यर्थियों’ को पकड़ना कैसे संभव था?
- सुरक्षा चूक: परीक्षा केंद्रों पर न तो इंटरनेट बंद किया गया, न ही बायोमेट्रिक या जैमर जैसी बुनियादी सुरक्षा व्यवस्थाएं की गईं। यहाँ तक कि एसओजी को वीडियोग्राफी का रिकॉर्ड तक उपलब्ध नहीं कराया गया।
गैंग्स का ‘नेटवर्क’ और सोशल मीडिया का ‘सैलाब’
हाईकोर्ट ने एसओजी जांच का हवाला देते हुए बताया कि बीकानेर के ‘मैट्रिक्स कोचिंग’ के जरिए कालेर गैंग और जयपुर के ‘रवींद्र बाल भारती स्कूल’ के जरिए जगदीश गैंग तक पेपर पहुँचा।
- कोर्ट का तर्क: चूंकि पेपर सोशल मीडिया साइट्स और व्हाट्सएप पर बड़े पैमाने पर सर्कुलेट हुआ, इसलिए यह कहना गलत है कि यह केवल कुछ लोगों तक सीमित था। सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पेपर के ‘सफर’ का पता लगाना मुमकिन नहीं है।
सजा का प्रावधान: 3 साल से उम्रकैद तक का सफर
कोर्ट ने इस बात को भी रेखांकित किया कि 2021 में पेपर लीक के लिए मात्र 3 साल की सजा थी। लेकिन राजस्थान सरकार ने अब इसे बदलकर आजीवन कारावास और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने में बदल दिया है। वर्तमान कानून के तहत दोषियों की संपत्ति कुर्क करने का भी कड़ा प्रावधान है।
“पूरी प्रणाली दूषित है”
एसओजी की विरोधाभासी रिपोर्टों पर टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने कहा कि ‘दागी’ और ‘सही’ उम्मीदवारों को अलग करना न तो संभव है और न ही विश्वसनीय। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दागी उम्मीदवारों की संख्या उतनी ही नहीं है जितने पकड़े गए हैं, बल्कि यह आंकड़ा बहुत बड़ा हो सकता है। ऐसे में दूषित हो चुकी इस परीक्षा प्रणाली को रद्द करना ही कानून सम्मत है।
V. पेपर लीक कानून: 2021 VS 2026
| विशेषता | वर्ष 2021 (तत्कालीन) | वर्तमान कानून (2026) |
| अधिकतम सजा | 3 वर्ष जेल | आजीवन कारावास (Life Term) |
| जुर्माना | सामान्य | ₹10 लाख से ₹10 करोड़ तक |
| संपत्ति | कोई प्रावधान नहीं | जब्ती और कुर्की (Attachment) |
| जांच अधिकारी | सामान्य पुलिसकर्मी | ASP स्तर का अधिकारी (न्यूनतम) |
