जिंदा बेटी का छपवाया ‘शोक संदेश’: राजस्थान में आहत पिता का चौंकाने वाला कदम, लव मैरिज करने पर तोड़ा जीवन भर का नाता

भीलवाड़ा/शक्करगढ़: एक पिता के लिए उसकी बेटी ही उसका पूरा संसार होती है, लेकिन जब वही लाडली परिवार की मर्जी और सामाजिक मर्यादाओं के खिलाफ जाकर फैसला ले, तो एक पिता की भावनाएं किस कदर आहत होती हैं, इसका एक बेहद चौंकाने वाला और मार्मिक उदाहरण राजस्थान के शक्करगढ़ थाना क्षेत्र के आमलदा गांव में देखने को मिला है। बेटी के फैसले से पूरी तरह टूट चुके पिता देवेंद्र सिंह कानावत ने अपनी जीवित पुत्री को परिवार के लिए ‘मृत’ मानकर उसका बाकायदा ‘शोक संदेश’ (Condolence Card) छपवा दिया है।

सपनों का महल ढहा, तो पिता ने किया ‘त्याग’

जानकारी के अनुसार, आमलदा निवासी देवेंद्र सिंह ने अपनी पुत्री को बड़े अरमानों के साथ उच्च शिक्षा के लिए जयपुर भेजा था। पिता का सपना था कि बेटी पढ़-लिखकर कुल का नाम रोशन करेगी। लेकिन, पुत्री ने परिवार की इच्छा के विरुद्ध जाकर अन्य समाज के एक युवक के साथ अपना नाता जोड़ लिया। जब पुलिस ने दोनों को दस्तयाब किया, तो थाने में एक हृदयविदारक दृश्य देखने को मिला। पिता देवेंद्र सिंह ने अपनी बेटी के सामने झोली फैलाकर उसे घर लौटने की मिन्नतें कीं, लेकिन बेटी अपने फैसले पर अड़ी रही। इसी चोट ने पिता को यह कठोर निर्णय लेने पर मजबूर कर दिया।

शोक संदेश में घोषित किए मृत्युभोज के कार्यक्रम

बेटी के इस कदम से आहत पिता ने अब उसे हमेशा के लिए त्याग दिया है। छपवाए गए शोक पत्र में बाकायदा पुत्री की फोटो लगाई गई है और निम्नलिखित कार्यक्रम घोषित किए गए हैं:

  • स्वर्गवास की तिथि: 20 मार्च 2026 (जिस दिन वह युवक के साथ गई)।
  • तीये की बैठक: आज, 22 मार्च (रविवार) को।
  • ब्रह्मभोज (मृत्युभोज): 31 मार्च को।

कार्ड के नीचे शोक संतप्त में पिता देवेंद्र सिंह सहित पूरे परिवार का नाम लिखा गया है। यह कार्ड अब सोशल मीडिया और पूरे क्षेत्र में भारी चर्चा का विषय बना हुआ है।

पुलिस का पक्ष: ‘बालिग को अपनी मर्जी से जाने का अधिकार’

इस पूरे घटनाक्रम पर शक्करगढ़ थानाधिकारी पूरणमल मीणा ने बताया कि युवती बालिग है। थाने में उसे परिजनों से मिलवाया गया था और समझाने का काफी प्रयास हुआ, लेकिन वह युवक के साथ रहने पर अड़ी रही। कानूनन बालिग को उसकी मर्जी के साथ जाने की अनुमति है। दोनों ने पुलिस से सुरक्षा मांगी है। परिजनों द्वारा शोक संदेश छपवाना उनका अपना निजी और भावनात्मक निर्णय है।

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