राजस्थान पंचायत चुनाव 2026: अब न पढ़ाई की बंदिश, न तीसरी संतान का डर; जानें नई पात्रता के मायने

जयपुर: राजस्थान में होने वाले आगामी पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों से पहले भजनलाल सरकार ने पात्रता नियमों को लेकर चल रहे तमाम असमंजस को दूर कर दिया है। विधानसभा में एक लिखित प्रश्न के जवाब में सरकार ने स्पष्ट किया है कि चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता की कोई अनिवार्यता नहीं होगी। यानी प्रदेश में अब ‘अनपढ़’ या कम पढ़े-लिखे व्यक्ति भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बनकर चुनाव लड़ सकेंगे।

‘दो संतान’ के नियम में बड़ी राहत

सबसे महत्वपूर्ण बदलाव दो संतान की नीति को लेकर है। सरकार ने संकेत दिए हैं कि वह 30 साल पुराने उस नियम को हटाने जा रही है, जिसके तहत दो से अधिक संतान होने पर व्यक्ति चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य हो जाता था।

  • ताज़ा स्थिति: इस नियम में संशोधन के लिए फाइल विधि विभाग (Law Department) को भेजी जा चुकी है।
  • लाभ: इस बदलाव से उन हजारों राजनीतिक कार्यकर्ताओं को लाभ मिलेगा जो तीसरी संतान होने के कारण पिछले कई वर्षों से चुनावी मैदान से बाहर थे।

शैक्षिक अनिवार्यता पर यू-टर्न

पिछली भाजपा सरकार द्वारा लागू की गई शैक्षिक योग्यता की शर्त को लेकर चर्चा थी कि इसे फिर से अनिवार्य बनाया जा सकता है, लेकिन सरकार ने अब साफ कर दिया है कि फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 की धारा 21 में संशोधन की कोई योजना नहीं है, जिसका अर्थ है कि शैक्षणिक योग्यता की बाधा इस बार उम्मीदवारों के सामने नहीं आएगी।

चुनाव का संभावित समय

प्रदेश में निकाय और पंचायत चुनाव मई 2026 के आसपास होने की संभावना है। सरकार “वन स्टेट, वन इलेक्शन” की तर्ज पर इन चुनावों को एक साथ कराने की तैयारी में है। नियमों में इन बदलावों के बाद अब चुनावी रणभेरी बजने का इंतज़ार है, जिससे स्थानीय राजनीति का स्वरूप पूरी तरह बदलने वाला है।

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