राजस्थान के बूंदी जिले में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने न केवल एक गरीब परिवार की नींद उड़ा दी है, बल्कि सरकारी तंत्र और डिजिटल सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले के झालीजी का बराना निवासी विष्णु कुमार प्रजापत, जो मटकी बेचकर अपना गुजारा करते हैं, उन्हें आयकर विभाग ने 8 करोड़ 98 लाख 79 हजार 260 रुपये जमा करने का डिमांड नोटिस थमाया है।
कैसे शुरू हुआ ‘9 करोड़’ का यह संकट?
पीड़ित विष्णु कुमार के अनुसार, उन्हें सबसे पहले 11 मार्च 2025 को आयकर विभाग से एक नोटिस मिला था। इसमें दावा किया गया था कि उन्होंने वित्तीय वर्ष 2020-21 के दौरान सुरेंद्र सिंह बाबेल नामक व्यक्ति के साथ 10 करोड़ 61 लाख 83 हजार रुपये का विक्रय लेनदेन किया है।
विष्णु का कहना है कि वे न तो इस व्यक्ति को जानते हैं और न ही कभी मुंबई गए हैं। जब उन्होंने जीएसटी पोर्टल पर जांच की, तो पता चला कि 19 मार्च 2020 को उनके पैन और आधार कार्ड का उपयोग कर मुंबई के गिरगांव में ‘भूमिका ट्रेडिंग’ नाम से एक फर्जी फर्म रजिस्टर्ड करवाई गई थी।
एक साल का संघर्ष और पुलिस की ‘लापरवाही’
विष्णु ने पिछले साल 16 अप्रैल 2025 को गेंडोली थाने में अपने दस्तावेजों के दुरुपयोग को लेकर प्राथमिकी दर्ज करवाई थी। लेकिन आरोप है कि पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझे बिना ही इसमें एफआर (Final Report) लगा दी और केस बंद कर दिया।
अब 18 मार्च 2026 को आयकर विभाग ने अंतिम डिमांड नोटिस जारी कर एक माह के भीतर 9 करोड़ रुपये जमा करने का आदेश दिया है। विष्णु ने अपनी वास्तविक आय मात्र 95 हजार रुपये दिखाई है, लेकिन सिस्टम की इस ‘डिजिटल चूक’ ने उन्हें करोड़ों का कर्जदार बना दिया है।
एसपी बूंदी का आश्वासन: अब DSP करेंगे जांच
बुधवार को पीड़ित ने बूंदी पुलिस अधीक्षक अवनीश शर्मा से मुलाकात कर अपनी पीड़ा सुनाई। एसपी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए गेंडोली पुलिस द्वारा लगाई गई एफआर की समीक्षा करने और अब पुलिस उपाधीक्षक (DSP) स्तर से जांच करवाने का आश्वासन दिया है।
