राजस्थान की वीर धरा एक बार फिर अपने प्राचीन गौरव और इतिहास के पन्नों को खोल रही है। झुंझुनूं जिले की खेतड़ी तहसील के त्योंदा गांव स्थित ‘रीढ़ का टीला’ पर चल रहे पुरातात्विक उत्खनन में एक हजार साल पुराने भव्य मंदिर के अवशेष मिले हैं। इसे शेखावाटी क्षेत्र के मध्यकालीन इतिहास के लिए एक क्रांतिकारी खोज माना जा रहा है।
पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा जनवरी 2026 से यहां वैज्ञानिक उत्खनन (Scientific Excavation) किया जा रहा है। इस स्थल की प्रगति का जायजा लेने हाल ही में विभाग के निदेशक डॉ. पंकज धरेंद्र, जयपुर संभाग के अधीक्षक नीरज त्रिपाठी और अल्बर्ट हॉल के अधीक्षक महेंद्र निम्हल ने निरीक्षण किया।

9वीं से 12वीं शताब्दी के बीच का हो सकता है मंदिर
उत्खनन अधिकारी विवेक शुक्ला ने निरीक्षण टीम को जानकारी दी कि अब तक मिले साक्ष्य 9वीं से 12वीं शताब्दी के प्रतीत होते हैं। खुदाई के दौरान पत्थरों से निर्मित मंदिर का फर्श, स्तंभों के आधार (Pillar Bases), अर्धवृत्ताकार संरचनाएं, दरवाजों के चौखटे और नक्काशीदार पत्थर के ब्लॉक प्राप्त हुए हैं।
मूर्तियां और टेराकोटा की कलाकृतियां भी मिलीं

खोज में न केवल मंदिर की संरचना, बल्कि धार्मिक महत्व की वस्तुएं भी मिली हैं। उत्खनन के दौरान:
- देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्तियों के खंड (Fragments)।
- विभिन्न स्तरों पर प्राचीन मिट्टी के बर्तन (Pottery)।
- टेराकोटा से बनी कलाकृतियां और अन्य वस्तुएं।
निदेशक के निर्देश: वैज्ञानिक विश्लेषण और संरक्षण पर जोर
निदेशक डॉ. पंकज धरेंद्र ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्राप्त सामग्री का वैज्ञानिक विश्लेषण (Scientific Analysis) कराया जाए ताकि सटीक काल-निर्धारण (Dating) हो सके। उन्होंने पुरावशेषों को सुरक्षित रखने के लिए उनके रासायनिक उपचार (Chemical Treatment) और साइट की मैपिंग व ड्रॉइंग के कार्य में तेजी लाने को कहा है।

“त्योंदा के ‘रीढ़ का टीला’ से मिल रहे अवशेष राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत को जोड़ने में मील का पत्थर साबित होंगे। हमारा लक्ष्य इनका संरक्षण करना और इस प्राचीन बस्ती के रहस्यों को दुनिया के सामने लाना है।” — डॉ. पंकज धरेंद्र, निदेशक, पुरातत्व विभाग
जैसे-जैसे खुदाई आगे बढ़ रही है, त्योंदा गांव अब पुरातत्व के वैश्विक मानचित्र पर उभर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैज्ञानिक रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि यह प्राचीन काल में कितना विशाल धार्मिक और व्यापारिक केंद्र रहा होगा।
