EXPOSE NOW: जयपुर में मौत का कारोबार उजागर! करोड़ों की नकली एंटीबायोटिक दवाओं का जहरीला जाल

अलर्ट! ‘QCEPOD 200’ नहीं, यह है धीमा जहर; आपकी सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं सफेदपोश अपराधी, औषधि विभाग ने किया सावधान!

उदयपुर-जयपुर | गुलाबी नगरी जयपुर और झीलों की नगरी उदयपुर में जब आप बीमार पड़ते हैं और दवा की दुकान से कोई एंटीबायोटिक दवा खरीदते हैं, तो क्या आप वाकई जानते हैं कि आप क्या खा रहे हैं? एक ऐसी चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई है, जिसने राजस्थान से लेकर हिमाचल प्रदेश तक दवा उद्योग की नींव हिला दी है। औषधि नियंत्रण विभाग की संयुक्त कार्रवाई में एक ऐसे जहरीले नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है, जो करोड़ों रुपये के नकली दवाओं के साम्राज्य का संचालन कर रहा था।

मामले की गंभीरता को देखते हुए, औषधि नियंत्रण विभाग ने QCEPOD 200 नाम की एंटीबायोटिक दवा को लेकर प्रदेशभर में ‘रेड अलर्ट’ जारी कर दिया है और इसकी बिक्री व उपयोग पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।

दवा या मौत का पैगाम? कैसे हुआ इस घिनौने खेल का पर्दाफाश!

यह पूरा मामला तब खुला जब औषधि नियंत्रण अधिकारी (भरतपुर) ने नियमित जांच के दौरान इण्डियन मेडिकल एजेंसी से टेबलेट Qcepod 200 (Batch No. VT 242312) का नमूना लिया। किसी को अंदाज़ा नहीं था कि यह साधारण सा नमूना एक बहुत बड़े भ्रष्टाचार और साजिश की परतें उधेड़ देगा। जब इस दवा को लैब में जांचा गया, तो परिणाम हैरान करने वाले थे—दवा मानकों पर पूरी तरह फेल रही। यानी, इसमें वह सक्रिय औषधि (API) थी ही नहीं, जो होनी चाहिए थी।

जांच रिपोर्ट के आधार पर औषधि नियंत्रक अजय फाटक ने आधिकारिक तौर पर इसे ‘नकली’ (Spurious) घोषित करते हुए पूरे राजस्थान में ALERT नोटिस जारी कर दिया। सवाल यह है: जो दवा आपको ठीक करने के लिए थी, क्या वह आपको और बीमार कर रही थी?

4 लाख की नकली दवाओं का ‘ब्लैक मार्केट’ में खपाने का मास्टर प्लान!

जांच में सामने आया कि यह सिर्फ एक दवा नहीं, बल्कि एक संगठित साजिश थी। हिमाचल प्रदेश के बद्दी स्थित निर्माता फर्म मैसर्स VADSP Pharmaceutical ने यह नकली दवा जयपुर की फर्म मैसर्स Iqumed Healthcare को बेची थी। यानी, सफेदपोश अपराधियों ने 4 लाख रुपये से अधिक की नकली दवाओं को जयपुर की सप्लाई चेन में खपाने की साजिश रची थी।

कार्रवाई के मुख्य बिंदु: औषधि विभाग का बड़ा हमला

  1. विशेष टीम का गठन: सहायक औषधि नियंत्रक जितेन्द्र मीना के नेतृत्व में एक विशेष टीम (जिसमें अर्जुन मीना, मुकेश चौधरी, महेश ब्याडवाल और पूनम महिंद्रा शामिल थे) ने Iqumed Healthcare पर छापेमारी की।
  2. बड़ी बरामदगी: जांच में पाया गया कि 4 लाख रुपये से अधिक की नकली दवाएं पहले ही बेची जा चुकी थीं। टीम ने मौके से नकली दवा के 4 और नमूने लिए हैं।
  3. सीजिंग और पाबंदी: टीम ने शेष स्टॉक के उपयोग व बिक्री पर पाबंदी लगा दी है। जप्त दवा के लिए न्यायालय से अभिरक्षा आदेश प्राप्त कर लिए गए हैं।

जालौर और भरतपुर तक फैला जहर का नेटवर्क!

यह जहरीला नेटवर्क केवल जयपुर तक सीमित नहीं था। जांच में पता चला है कि इन नकली दवाओं की सप्लाई जालौर और भरतपुर के दवा विक्रेताओं को भी की गई थी, जिससे ग्रामीण इलाकों की जनता की जान खतरे में पड़ गई है। दोनों जिलों में कुल 4 दवा विक्रेताओं के ठिकानों की जांच की गई और जालौर-भरतपुर के अधिकारियों ने 5 और नमूने जांच के लिए भेजे हैं।

अब ‘सोर्स’ पर प्रहार: क्या रसूखदार भी फंसेंगे?

मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग अब इस नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने की तैयारी में है। औषधि विभाग ने एक विशेष टीम को हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड भेजने के निर्देश दिए हैं, ताकि निर्माता फर्म की असलियत सामने आ सके और दोषियों को सलाखों के पीछे भेजा जा सके।

जनहित में अपील: यदि आपके पास है QCEPOD 200, तो अभी रुकें!

यदि आपने हाल ही में Qcepod 200 (Batch No. VT 242312) खरीदी है, तो इसका सेवन तुरंत बंद करें और नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या औषधि नियंत्रण विभाग को सूचित करें। आपकी सतर्कता न केवल आपकी जान बचा सकती है, बल्कि इस जहरीले खेल को खत्म करने में भी मदद कर सकती है।

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