राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर ‘शब्दबाण’ चलने शुरू हो गए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सोशल मीडिया सीरीज ‘इंतजारशास्त्र’ पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने ऐसा पलटवार किया है, जिसने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। मंगलवार को राठौड़ ने दो टूक शब्दों में गहलोत को राजनीति से संन्यास लेने और नई पीढ़ी के लिए रास्ता साफ करने की सलाह दे डाली।
’75 के बाद संन्यास आश्रम ही विकल्प’
मदन राठौड़ ने गहलोत की उम्र का हवाला देते हुए तंज कसा कि 75 वर्ष की आयु पार करने के बाद व्यक्ति को संन्यास आश्रम की ओर रुख करना चाहिए। उन्होंने कहा:
“गहलोत साहब अभी वानप्रस्थ में हैं, लेकिन अब समय आ गया है कि वे ‘इंतजारशास्त्र’ को छोड़कर ‘संतोषशास्त्र’ अपनाएं। आखिर कब तक सत्ता के इंतजार में बैठे रहेंगे? अब उन्हें नई पीढ़ी का मार्गदर्शन करना चाहिए न कि खुद दौड़ में बने रहना चाहिए।”
स्वभाव और शब्दों पर साधा निशाना
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष यहीं नहीं रुके, उन्होंने गहलोत के व्यवहार और उनकी भाषा पर भी कड़ा प्रहार किया। राठौड़ ने आरोप लगाया कि बढ़ती उम्र का असर गहलोत के विवेक और शब्दों पर दिखने लगा है। उन्होंने कहा कि गहलोत का शब्द चयन बिगड़ गया है; कभी वे अपनों को दूर रखने की बात करते हैं और कभी ‘नकारा-निकम्मा’ जैसे शब्दों का उपयोग करते हैं। राठौड़ ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जब कोई स्वभाव से सनकी होने लगे और विवेक शून्य हो जाए, तो समझ लेना चाहिए कि रिटायरमेंट का वक्त आ गया है।
“जहां गए, वहां बंटाधार किया”
कांग्रेस की वर्तमान स्थिति के लिए गहलोत को जिम्मेदार ठहराते हुए मदन राठौड़ ने कहा कि उन्होंने पार्टी को रसातल में पहुँचा दिया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पंजाब, गुजरात और महाराष्ट्र में जहाँ भी गहलोत को प्रभारी बनाया गया, वहाँ पार्टी का बंटाधार ही हुआ। राठौड़ के अनुसार, गहलोत का ‘जादुई जलवा’ अब पूरी तरह खत्म हो चुका है।
दिल्ली दौरों पर चुटकी
गहलोत के हालिया दिल्ली दौरों और राष्ट्रीय राजनीति में सक्रियता पर चुटकी लेते हुए राठौड़ ने कहा कि वे केवल चर्चा में बने रहने के लिए दिल्ली के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन इस ‘इंतजार’ में वे सिर्फ दुबले ही होंगे, हासिल कुछ नहीं होने वाला।
अब देखना यह है कि मदन राठौड़ के इस ‘व्यक्तिगत’ हमले पर अशोक गहलोत या कांग्रेस खेमे से क्या प्रतिक्रिया आती है।
