राजस्थान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने अलवर जिले के कठूमर थाने में बड़ी कार्रवाई करते हुए एक पुलिस कांस्टेबल और एक निजी व्यक्ति (दलाल) को 20,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है । इस कार्रवाई के दौरान आरोपी एएसआई (ASI) को ट्रैप की भनक लग गई और वह मौके से फरार होने में कामयाब रहा ।
पूरा मामला क्या है?
शिकायतकर्ता राजपाल सिंह ने एसीबी मुख्यालय की हेल्पलाइन 1064 पर शिकायत दर्ज करवाई थी । शिकायत के अनुसार, उसके बुआ के लड़के ईश्वर सिंह ने एक युवती से प्रेम विवाह किया था, जिसके बाद युवती के परिजनों ने कठूमर थाने में मुकदमा दर्ज करवाया था । ईश्वर सिंह को पुलिस रिमांड से बचाने और मुकदमे में मदद करने की एवज में एएसआई नरेन्द्र कुमार मीणा, कांस्टेबल रामेश्वर सिंह और दलाल निरंजन सिंह द्वारा 40,000 रुपये की रिश्वत मांगी जा रही थी ।
एसीबी का सत्यापन और ट्रैप
एसीबी ने शिकायत का सत्यापन करवाया, जिसमें रिश्वत की मांग की पुष्टि हुई । सत्यापन के दौरान एएसआई नरेन्द्र मीणा ने परिवादी से 1,000 रुपये अग्रिम के रूप में ले लिए थे और शेष राशि बाद में देने पर सहमति बनी थी ।
बुधवार, 25 मार्च 2026 को एसीबी दौसा के उप अधीक्षक रविन्द्र सिंह के नेतृत्व में टीम ने कठूमर थाने के बाहर जाल बिछाया । कांस्टेबल रामेश्वर सिंह के कहने पर परिवादी ने 20,000 रुपये की रिश्वत राशि दलाल निरंजन सिंह को दी । जैसे ही दलाल ने रिश्वत के पैसे अपनी पायजामे की जेब में रखे, एसीबी टीम ने उसे और कांस्टेबल को दबोच लिया ।
हाथ धोने पर निकला ‘गुलाबी रंग’
ट्रैप की कार्रवाई के बाद जब दलाल निरंजन सिंह के हाथों को सोडियम कार्बोनेट के घोल में धुलवाया गया, तो घोल का रंग गहरा गुलाबी हो गया, जो रिश्वत लेने का वैज्ञानिक प्रमाण है । इसके अलावा उसकी जेब के धौवन का रंग भी गुलाबी पाया गया ।
एएसआई हुआ फरार
कार्रवाई के दौरान आरोपी एएसआई नरेन्द्र कुमार मीणा को ट्रैप की भनक लग गई और वह थाने से फरार हो गया । एसीबी की टीम अब उसकी तलाश में जुटी है ।
कानूनी कार्यवाही
एसीबी ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7, 7ए और भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 61(2) के तहत मामला दर्ज किया है । गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय में पेश किया जाएगा और मामले की आगे की जांच एसीबी अलवर के उप पुलिस अधीक्षक शब्बीर खान को सौंपी गई है ।
