मानसरोवर लाइन हादसा: बिना जांच क्लीन चिट देने की कोशिश नाकाम, अब हीरापुरा XEN करेंगे निष्पक्ष जांच

जयपुर के मानसरोवर इलाके में एक निर्माणाधीन कॉम्प्लेक्स के पास सोमवार सुबह हुए भीषण हाईटेंशन लाइन हादसे ने न केवल एक मजदूर की जान जोखिम में डाल दी, बल्कि पूरे इलाके में दहशत फैला दी। चश्मदीदों के अनुसार, धमाका इतना भीषण था कि लगा जैसे एक साथ 10 गैस सिलेंडर फट गए हों। इस हादसे के बाद बिजली विभाग के अधिकारियों द्वारा आनन-फानन में “क्लीन चिट” देने की कोशिशों का पर्दाफाश होने के बाद, अब मामले में नया मोड़ आ गया है और उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच के आदेश दिए गए हैं।

हादसे का खौफनाक मंजर

जानकारी के अनुसार, 30 मार्च सोमवार सुबह करीब 10:49 बजे, मानसरोवर की पत्रकार कॉलोनी में खरबास सर्कल के पास एक निर्माणाधीन चार मंजिला कॉम्प्लेक्स में बिहार के नालंदा निवासी मजदूर रामनाथ काम कर रहा था। वह चौथी मंजिल पर लिफ्ट के अटके हुए तार को खींच रहा था, तभी तार उछलकर ऊपर से गुजर रही सांगानेर-मानसरोवर 132 केवी (एक्स्ट्रा हाई वोल्टेज) हाईटेंशन लाइन के इंडक्शन जोन में आ गया।

पलक झपकते ही जोरदार शार्ट सर्किट हुआ और तेज धमाके के साथ रामनाथ आग की लपटों में घिर गया। धमाके की आवाज सुनकर नीचे खड़े राहगीर और साथी मजदूर जान बचाने के लिए गलियों में भागने लगे। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई।

ठेकेदार फरार, मजदूर तड़पता रहा

हादसे के बाद ठेकेदार मानवीयता को ताक पर रखकर करीब 50 फीसदी से ज्यादा झुलस चुके रामनाथ को तड़पता छोड़ मौके से भाग गया। बाद में साथी मजदूर उसे लेकर एसएमएस अस्पताल पहुंचे, लेकिन कानूनी कार्रवाई के डर से उसे वहां भर्ती कराने के बजाय निजी अस्पतालों के चक्कर काटते रहे। अंततः उसे मानसरोवर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी स्थिति नाजुक बनी हुई है।

विधानसभा तक बिजली ठप

इस शार्ट सर्किट का असर इतना व्यापक था कि पत्रकार कॉलोनी, मानसरोवर से लेकर राजस्थान विधानसभा तक करीब 12 किलोमीटर के दायरे में आधे घंटे तक बिजली गुल हो गई। डिस्कॉम के इंजीनियरों में हड़कंप मच गया। पहले लगा कि 11 या 33 केवी के फीडर खराब हैं, लेकिन बाद में पता चला कि फॉल्ट सीधे 132 केवी की मुख्य लाइन में आया है।

अधिकारियों की लापरवाही और नया मोड़: नहीं मिलेगी बिना जांच ‘क्लीन चिट’

इस मामले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब यह खबर सामने आई कि विद्युत निगम के कुछ अधिकारियों ने हादसे के मौके पर जाए बिना ही ठेकेदार या संबंधितों को “क्लीन चिट” दे दी थी। इस लापरवाहीपूर्ण रवैये के उजागर होने के बाद प्रसारण निगम प्रबंधन ने अपना पिछला रुख बदलते हुए तुरंत जांच के आदेश जारी किए हैं।

मुख्य अभियंता (टीएंडसी) के.के. मीणा ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने से पहले किसी को भी क्लीन चिट नहीं दी जाएगी।

अब ये होगा: हीरापुरा XEN करेंगे निष्पक्ष जांच

प्रसारण निगम प्रबंधन ने अब इस हादसे की निष्पक्ष जांच की जिम्मेदारी हीरापुरा 220 केवी ग्रिड स्टेशन के अधिशासी अभियंता (एक्सईएन) पी.सी. जाट को सौंपी है। विभागीय आदेशों के अनुसार, आगामी 7 दिनों में वस्तुस्थिति की विस्तृत रिपोर्ट प्रबंधन को सौंपी जाएगी।

जांच के मुख्य बिंदु होंगे:

  1. निर्माणाधीन कॉम्प्लेक्स निर्माण के लिए जेडीए से ली गई अनुमति के दस्तावेजों की पड़ताल होगी।
  2. हादसा किसकी लापरवाही से हुआ, यह तय किया जाएगा।
  3. स्थानीय लोगों से संवाद कर मौके की रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

प्रशासनिक व्यवस्था पर खड़े हुए गंभीर सवाल

हादसे ने जेडीए और प्रसारण निगम दोनों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं:

  • अनुमति का खेल: ‘राइट ऑफ वे’ (Right of Way) नियम के मुताबिक हाईटेंशन लाइन के केंद्र से 13.5 मीटर तक कोई निर्माण नहीं हो सकता। ऐसे में जेडीए ने इस कॉम्प्लेक्स के निर्माण को मंजूरी कैसे दी?
  • निगम की अनदेखी: प्रसारण निगम के इंजीनियरों को पेट्रोलिंग के दौरान इस अवैध निर्माण का पता क्यों नहीं चला?
  • अफसरों की बेरुखी: इतने बड़े हादसे के बावजूद विद्युत निगम के अधिशासी अभियंता से लेकर मुख्य अभियंता तक मौके पर नहीं पहुंचे।

जिम्मेदारों का बयान

मानसरोवर के विद्युत प्रसारण निगम के अधिशासी अभियंता हरभजन सिंह ने अपना पल्ला झाड़ते हुए कहा, “इस निर्माण के लिए हमने कोई अनुमति नहीं दी। जेडीए ने निर्माण की अनुमति दी। निगम ने ठेकेदार के खिलाफ थाने में मामला दर्ज कराया है।”

फिलहाल, पुलिस मामले की जांच कर रही है। वहीं, मुख्य अभियंता मीणा ने आमजन से अपील की है कि हाईटेंशन लाइन से उचित दूरी बनाए रखें, लोहे की वस्तुएं लेकर पास न जाएं और लाइन के नीचे गीले कपड़ों या पानी का उपयोग करने से बचें।

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