जयपुर: राजधानी में बिजली वितरण कंपनी (जयपुर डिस्कॉम) के टेंडरों में एक बेहद बड़े घोटाले का मामला सामने आया है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने तीन वर्ष पहले मिली एक शिकायत की गहन जांच के बाद पूर्व एमडी आर.एन. कुमावत, अतिरिक्त मुख्य अभियंता अनिल गुप्ता और अन्य के खिलाफ पद का दुरुपयोग करने और आपराधिक साजिश रचने के मामले में एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है।
एफआईआर के अनुसार, वर्ष 2022 की बजट घोषणा के तहत 20 और 22 जीएसएस (GSS) बनाने के लिए डिस्कॉम ने टेंडर निकाले थे। इन दोनों टेंडरों में ‘आरसी एंटरप्राइजेज’ नामक फर्म ने भाग लिया। सितंबर 2023 में वित्तीय बिड खोली गई, जिसके बाद कॉर्पोरेट लेवल परचेज कमेटी (CLPC) का गठन हुआ।
फर्जी दस्तावेजों से खुला राज और लौटा दी धरोहर राशि:
जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि टोंक और बूंदी जिलों में विद्युत इंफ्रास्ट्रक्चर कार्यों के लिए एक फर्म ने फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र (Fake Experience Certificate) लगाए थे। जब ‘टेलीकम्यूनिकेशन कंसलटेंट्स इंडिया लिमिटेड’ (TCIL) से इन दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे कोई दस्तावेज जारी नहीं किए गए थे। इसके बाद फर्म को टेंडर प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया।
नियमों के अनुसार फर्जी दस्तावेज पेश करने पर फर्म की धरोहर राशि जब्त कर उसे ब्लैकलिस्ट किया जाना चाहिए था, लेकिन CLPC ने आरटीपीपी एक्ट 2012 के विरुद्ध जाकर फर्म की 3.37 करोड़ रुपए की सिक्योरिटी मनी वापस लौटा दी।
लागत में 237 करोड़ की वृद्धि:
आरोप है कि बिड मूल्यांकन कमेटी की रिपोर्ट के बाद 4 अक्टूबर को हुई CLPC की मीटिंग में फर्म के साथ मिलीभगत की गई। वित्तीय शर्तों में बदलाव कर प्रोजेक्ट की लागत में करीब 237 करोड़ रुपए बढ़ा दिए गए। विभागीय जांच और एजी ऑडिट (AG Audit) में भी 226 करोड़ रुपए अधिक व्यय होने की पुष्टि हुई है।
