“पढ़ोगे-लिखोगे तो बनोगे नवाब, खेलोगे-कूदोगे तो जीतोगे खिताब”: वर्ल्ड रैंकिंग तीरंदाज और DSP रजत चौहान से खास बातचीत

राखी सिंह

बड़े-बुजुर्ग अक्सर कहा करते थे कि “खेलोगे-कूदोगे तो हो जाओगे खराब और पढ़ोगे-लिखोगे तो बनोगे नवाब।” यह कहावत उस समय के हिसाब से शायद सही थी क्योंकि तब शिक्षा का उद्देश्य पैरों पर खड़ा होना था। लेकिन आज के परिदृश्य में एक शब्द के बदलाव ने इसके मायने बदल दिए हैं। आज का मंत्र है— “खेलोगे-कूदोगे तो जीतोगे खिताब।”

जब खेल की बात होती है, तो चर्चा दूर तक जाती है। ऐसी ही एक खास चर्चा हमने की विश्व स्तरीय तीरंदाज (World Ranking Archer) और राजस्थान पुलिस में डीएसपी (DSP) के पद पर कार्यरत रजत चौहान से। रजत ने हाल ही में एशिया कप में स्वर्ण पदक (Gold Medal) और दो कांस्य पदक (Bronze Medals) जीतकर पूरी दुनिया में भारत का डंका बजाया है। जब हम उनके प्रैक्टिस ग्राउंड पर उनसे बात करने पहुँचे, तो उनके जीते हुए मेडल हमारे हाथों में थे। उन पदकों को छूकर जो गर्व महसूस हो रहा था, उससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि रजत और उनके परिवार के लिए यह अनुभूति कितनी महान होगी।

रजत चौहान के साथ हुई रोचक बातचीत के मुख्य अंश:

सवाल 1: एशिया कप की सफलता के बाद आप कैसा महसूस कर रहे हैं? जीत के लिए घबराहट (Nervousness) ज्यादा थी या जिम्मेदारी का अहसास?

जवाब: रजत ने बड़ी विनम्रता से कहा कि भारतवर्ष का मस्तक ऊँचा रखना अपने आप में बहुत बड़ी जिम्मेदारी होती है। उन्होंने बताया कि उन्होंने हमेशा मैदान पर निरंतर अभ्यास किया है। इसके अलावा, करोड़ों भारतीयों की उम्मीदों ने उन्हें इस खिताब को जीतने का बल दिया, जिसके कारण ही यह सफलता मुमकिन हो पाई है।

सवाल 2: क्या खिलाड़ियों को मानसिक दबाव (Pressure) से उबरने के लिए योग या व्यायाम करना चाहिए?

जवाब: जी हाँ, मैं खुद ग्राउंड पर प्रैक्टिस से पहले हमेशा एक्सरसाइज करता हूँ। योग मन को स्थिर और संयम बनाए रखने में बहुत मदद करता है। मैं नियमित रूप से ध्यान और प्राणायाम भी करता हूँ। किसी भी खिलाड़ी के लिए उसकी मेहनत तो जरूरी है ही, लेकिन साथ ही एक स्वस्थ शरीर और सकारात्मक सोच ही उसे लक्ष्य तक पहुँचाती है।

सवाल 3: खेल और पढ़ाई के बीच तालमेल को लेकर आपकी क्या राय है?

जवाब: यदि खेल में आपकी रुचि है, तो उसे अपना ध्येय बनाकर मेहनत करें और आगे बढ़ें। लेकिन पढ़ाई को छोड़ना नहीं चाहिए, क्योंकि पढ़ाई आपके ज्ञान को बढ़ाती है। इन दोनों का मेल ही आपको जीवन में सफलता के शिखर पर लेकर जाता है। रजत ने बच्चों से यह भी अपील की कि वे मोबाइल छोड़कर ग्राउंड में खेलें और समय से अपनी पढ़ाई पर भी ध्यान दें।

सवाल 4: राजस्थान में अब तीरंदाजी (Archery) को लेकर कैसा रुझान है?

जवाब: राजस्थान में अब लोग तीरंदाजी में काफी रुचि दिखाने लगे हैं। जब मैंने शुरुआत की थी और 2014 के एशियन गेम्स में गोल्ड जीता, फिर 2018 में सिल्वर और 2023 में दोबारा गोल्ड जीता, तब लोगों को लगा कि इस खेल में भी अपनी पहचान बनाई जा सकती है। तीरंदाजी में पदक जीतने के तीन मौके मिलते हैं— खिलाड़ी व्यक्तिगत रूप से, सामूहिक (Group) रूप से, या मिक्स्ड डबल (Mixed Double) में पदक जीत सकता है।

सवाल 5: सरकार से खिलाड़ियों को किस तरह का प्रोत्साहन मिल रहा है?

जवाब: राजस्थान सरकार पूरा सहयोग कर रही है। सरकार ने मेरी मेहनत को देखते हुए 2020 में मुझे डीएसपी पद पर नियुक्त किया और आज मैं इस पद पर कार्यरत हूँ। खिलाड़ियों को उनकी जीत के मुताबिक सरकारी नियुक्तियाँ दी जाती हैं। साथ ही, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी भी हमसे मिलकर हमारा मनोबल बढ़ाते हैं, जो किसी भी खिलाड़ी के लिए बहुत गर्व की बात है।

सवाल 6: जब आप ग्राउंड में बच्चों को तीरंदाजी करते देखते हैं, तो क्या आपको अपनी यात्रा याद आती है?

जवाब: हाँ, बिल्कुल! आज इन बच्चों को मेहनत करते देखकर अपनी पुरानी यादें ताजा हो जाती हैं। निरंतर अभ्यास ही वह कुंजी है जो आपको सफलता का स्वाद चखने का मौका देती है। मैंने आज तक जितने भी मेडल जीते हैं, वे सब इसी निरंतर अभ्यास का मीठा फल हैं।

निष्कर्ष साक्षात्कार के अंत में रजत ने एक बहुत गहरी बात कही। उन्होंने कहा कि “हार और जीत एक ही सिक्के के दो पहलू हैं, या कह लीजिए कि दोनों भाई हैं जो साथ चलते हैं। अब यह आप पर निर्भर करता है कि आप किसका हाथ पकड़ना चाहते हैं। यदि आप मेहनत करेंगे, तो सफलता आपका हाथ थाम लेगी। और अगर मेहनत में कोई कसर रह भी गई, तो हार आपको जीत का रास्ता दिखाएगी कि कैसे उस पर चलकर लक्ष्य को पूरा करना है।”

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